“भए प्रगट कृपाला...” गूंजा तो अवध बन गया रामलीला मैदान, झूम उठे भक्त
आगरा, 01 अक्टूबर। “भए प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौसल्या हितकारी...” चौपाई गूंजी और पल भर में रामलीला मैदान अयोध्या में बदल गया। शंखनाद, घंटियों और जय श्रीराम के जयघोष के बीच रघुनंदन के प्राकट्य का दृश्य साकार होते ही पूरा पंडाल भक्ति में झूम उठा।
श्री रामलीला महोत्सव 2026 के तहत गुरुवार को राम जन्म लीला का भावविभोर कर देने वाला मंचन हुआ। बाल स्वरूप के प्रथम दर्शन पाते ही श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं, माताओं-बहनों ने बधाई गीत गाए।
लीला की शुरुआत राजा दशरथ की संतान चिंता से हुई। कुलगुरु वशिष्ठ के निर्देश पर श्रृंगी ऋषि ने पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराया। अग्निदेव ने खीर का प्रसाद दिया, जिसे दशरथ ने तीनों रानियों कौशल्या, कैकेयी, सुमित्रा को दिया। समय पर चार तेजस्वी पुत्रों राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न का जन्म हुआ।जन्म होते ही शहनाइयां बजीं, पंडाल मंगल गीतों से गूंज उठा -
“कौशल्या जायो लल्ला, अवध में मचो हल्ला...”
“आज तो बधाई बाजी अयोध्या महल में...”
मुख्य अतिथि राज्यसभा सदस्य नवीन जैन ने हनुमानजी के चित्र और रामचरित मानस पर माल्यार्पण किया। रामलीला कमेटी के महामंत्री राजीव अग्रवाल ने उनका स्वागत किया। संचालन उपाध्यक्ष संजय तिवारी ने किया।
राजा दशरथ के स्वरूप संजय सिंघल और कौशल्या स्वरूप नीता सिंघल ने परिवार संग बधाई गीत गाए, पालने में चारों बालकों को झुलाया। श्रद्धालुओं में खिलौने, मिठाई, फल, टॉफियां बांटी गईं। पूरे परिसर को गुब्बारों से सजाया गया था। ब्रज के कलाकारों ने स्तुति और युगल नृत्य प्रस्तुत किए। राजा जनक स्वरूप अशोक कुमार गोयल, सुनयना स्वरूप लता गोयल ने भी स्वरूपों की आरती की।
दो अक्टूबर को रामलीला मैदान मिथिला नगरी में बदलेगा। राजा जनक-रानी सुनयना के स्वरूप हल चलाने की लीला करेंगे और मां जानकी के प्राकट्य का सजीव मंचन होगा।

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