पोइया घाट पर रिवर रैंचिंग: यमुना में छोड़ीं 50 हजार मछलियां, केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने किया आह्वान
आगरा, 27 अक्टूबर। यमुना नदी की घटती जैव विविधता को फिर से समृद्ध करने और मत्स्य संपदा के संरक्षण के उद्देश्य से मंगलवार को दयालबाग स्थित पोइया घाट पर रिवर रैंचिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्यमंत्री मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज प्रो. एस. पी. सिंह बघेल रहे।
इस दौरान प्रो. बघेल ने भारतीय मेजर कार्प प्रजाति - कतला, रोहू और मृगल की कुल 50 हजार मत्स्य अंगुलिकाओं को विधि-विधान के साथ यमुना नदी में प्रवाहित किया। इस पहल का उद्देश्य नदी में मछलियों की प्राकृतिक संख्या को बढ़ाना है, जिससे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बना रहे।
क्या है रिवर रैंचिंग?
रिवर रैंचिंग के तहत नदियों में वैज्ञानिक तरीके से देशी प्रजाति की मछलियों के बीज छोड़े जाते हैं। इससे न केवल नदी की जैव विविधता बढ़ती है, बल्कि पानी की गुणवत्ता में भी सुधार होता है क्योंकि कई मछलियां प्राकृतिक रूप से जल को स्वच्छ रखने में सहायक होती हैं। साथ ही यह स्थानीय मछुआरा समुदाय के लिए रोजगार और आय का स्थायी साधन भी बनता है।
मंत्री ने दिया स्वच्छ यमुना का संदेश
प्रो. बघेल ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में हमारी नदियों को स्वच्छ, निर्मल और जीवंत बनाने के लिए निरंतर प्रयास हो रहे हैं। यमुना केवल एक नदी नहीं, यह हमारी आस्था, संस्कृति और जीवनधारा का अभिन्न हिस्सा है।"
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा और सहायक नदियों के संरक्षण की योजना के तहत यमुना के लिए विशेष कार्य किए जा रहे हैं। रिवर रैंचिंग इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने आमजन से अपील की कि यमुना को प्रदूषणमुक्त बनाना केवल सरकार की नहीं, बल्कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। नदी में कचरा, प्लास्टिक और गंदा पानी न डालें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, समृद्ध और जीवंत यमुना का संकल्प लें।
कार्यक्रम में मत्स्य विभाग के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
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