श्रीराम के अमोघ अस्त्र से धराशायी हुआ कुंभकर्ण, आतिशबाजी के बीच जला 40 फुट ऊंचा पुतला

आगरा, 18 अक्टूबर। “छाड़ि कपट निज रूप बहोरी। सोइ रावनु कपट बल जोरी॥” रविवार को आगरा किला के सामने स्थित रामलीला मैदान में श्री रामलीला महोत्सव के अंतर्गत प्रभु श्रीराम और कुंभकर्ण के बीच भीषण युद्ध का सजीव मंचन किया गया। जय श्रीराम के जयकारों के बीच पूरी रणभूमि भक्तिमय हो उठी।
स्वरूपों की आरती नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के अध्यक्ष मनोज बंसल, हेल्प आगरा अध्यक्ष सुरेंद्र जैन, व्यापार मंडल के अध्यक्ष टी एन अग्रवाल और अपना घर अन्नपूर्णा महिला आश्रम की अध्यक्ष श्रीमती कांता के नेतृत्व में उनकी संस्थाओं के सदस्यों द्वारा की गई।
रावण ने जगाया कुंभकर्ण को
लीला का आरंभ लक्ष्मण जी के मूर्छा से जागने के प्रसंग से हुआ। रामसेना के पराक्रम से चिंतित रावण ने अपनी सेना को मजबूत करने के लिए कुंभकर्ण को जगाने का निर्णय लिया। छह माह तक निद्रा में रहने वाले कुंभकर्ण को जगाने के लिए रावण स्वयं उसके महल पहुंचा। थाल बजाकर, हाथियों से कुचलवाकर और नाना प्रकार के प्रयासों के बाद उसकी निद्रा टूटी। नींद से जागते ही वह मदमस्त हाथी की भांति युद्धभूमि की ओर चल पड़ा। विशालकाय कुंभकर्ण को रणभूमि में उतरते देख युद्ध का रोमांच और बढ़ गया।
रणभूमि में आमने-सामने आए राम और कुंभकर्ण
मंचीय लीला के बाद जैसे ही प्रभु श्रीराम और कुंभकर्ण की सेनाएं मैदान में उतरीं, युद्ध का दृश्य जीवंत हो उठा। प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण की ओर से शत्रु सेना पर तीरों की बौछार होने लगी। जवाब में कुंभकर्ण की सेना ने भी मोर्चा संभालते हुए प्रहार किए। तलवार, गदा और भालों से सैनिक एक-दूसरे पर वार करने लगे। दोनों रथों पर सवार स्वरूपों के बीच युद्ध देखने के लिए दर्शक उत्साहित नजर आए।
युद्ध के दौरान एक अलग ही नजारा देखने को मिला। तीरों की बौछार के बीच जब तीर मैदान में गिरते तो उन्हें उठाने के लिए दर्शक रथों के आगे-पीछे दौड़ पड़ते। मान्यता है कि रामलीला के तीर घर में रखने से सुख-समृद्धि आती है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा कर्मियों और पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
कुंभकर्ण पर प्रभु श्रीराम के लगातार प्रहार होते रहे, लेकिन उसका विशाल शरीर और युद्ध कौशल चुनौती बना रहा। रणभूमि में दोनों ओर से घमासान जारी रहा। अंततः प्रभु श्रीराम ने अमोघ अस्त्र का संधान किया। अस्त्र लगते ही कुंभकर्ण का शीश धड़ से अलग होकर धरती पर जा गिरा। कुंभकर्ण के वध के साथ ही मैदान जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। प्रभु श्रीराम ने कुंभकर्ण का उद्धार कर उसे श्रीधाम पहुंचाया।
गोलों से दहला रामलीला मैदान, जला 40 फुट ऊंचा पुतला
कुंभकर्ण के वध के साथ ही मैदान में आतिशबाजी शुरू हो गई। तोप के गोलों के धमाकों से पूरा रामलीला मैदान गूंज उठा और दर्शकों में उत्साह भर गया। इसके बाद कुंभकर्ण के लगभग 40 फुट ऊंचे पुतले का दहन किया गया। पुतला धू-धू कर जलने लगा तो दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। पुतला दहन से पहले भी मैदान में आकर्षक आतिशबाजी की गई।
समापन आरती में जनकपुरी महोत्सव समिति के मार्गदर्शक अजय अवागढ़, अध्यक्ष राजू यादव के नेतृत्व में पदाधिकारी भी शामिल हुए। इस अवसर पर श्रीरामलीला कमेटी के महामंत्री राजीव अग्रवाल, कोषाध्यक्ष ताराचंद अग्रवाल भगवानदास बंसल, विजय प्रकाश गोयल, संजय तिवारी, मुकेश जौहरी, रामकिशन अग्रवाल, विष्णु दयाल बंसल, मनोज अग्रवाल, महेश चंद, राकेश जैन, संजय अग्रवाल, रामांशु शर्मा, रामाशीष शर्मा आदि उपस्थित रहे।

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