एनएच-19 पर भारी वाहनों से हादसे, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस, अगली सुनवाई 25 नवंबर को
आगरा, 16 अक्टूबर। जिले में एनएच-19 पर भारी वाहनों से हो रही दुर्घटनाओं का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शहर निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता और सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता के.सी. जैन ने कोर्ट में मुद्दा उठाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय, एनएचएआई और यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण (YEIDA) को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी।
के.सी. जैन ने बताया कि उनका अंतरिम आवेदन संख्या 18487/2026 आज सूचीबद्ध नहीं था, फिर भी सड़क सुरक्षा मामलों की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उनकी बात सुनी।
400 करोड़ का बाईपास बना, फिर भी वाहन शहर के बीच से गुजर रहे -
आवेदन में बताया गया कि 400 करोड़ की लागत से बना 14 किमी लंबा आगरा उत्तरी बाईपास 04 दिसंबर 2025 से चालू है। यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़कर यह 38 किमी का वैकल्पिक मार्ग देता है, जबकि शहर के भीतर का रास्ता 34 किमी है। यानी बाहर से जाने पर सिर्फ 04 किमी ज्यादा चलना पड़ता है। फिर भी ट्रक, कंटेनर शहर के बीच से निकल रहे हैं।
एनएच-19 सिकंदरा, खंदारी, भगवान टॉकीज, रामबाग जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों से गुजरता है, जहां स्कूल, अस्पताल और बाजार हैं।
हादसों का जिक्र -
8 जनवरी 2026 को विजय नगर में ट्रक पलटने से 3 मौतें, 15 जनवरी को सिकंदरा में ट्रक की टक्कर से 2 मौतें सहित कई हादसों का हवाला दिया गया।
टोल व्यवस्था बनी वजह -
बाईपास और यमुना एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग टोल होने से कई भारी वाहन टोल बचाने के लिए शहर के भीतर से गुजर रहे हैं।
मांग - जिन भारी वाहनों को आगरा में रुकना नहीं है, उन्हें बाईपास से जाना अनिवार्य किया जाए, अधिसूचना जारी हो, साइनेज लगें और उल्लंघन पर कार्रवाई हो। साथ ही देश के अन्य शहरों में भी यही व्यवस्था लागू हो।
के.सी. जैन ने कहा, "400 करोड़ खर्च कर बाईपास बना तो भारी वाहनों को शहर के बीच से क्यों गुजरने दिया जा रहा है? सड़क सुरक्षा का मतलब हादसे के बाद मुआवजा नहीं, हादसा रोकना है।"
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