राम के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा "रामकाज में उदासीन!" रामलीला महोत्सव में चार दिन शेष, मेयर या नगर आयुक्त ने नहीं किया दौरा
आगरा, 19 सितम्बर। शहरभर में स्वच्छता अभियान का ढिंढोरा पीट रहा नगर निगम नगर के प्रमुख रामलीला महोत्सव के प्रति उदासीन बना हुआ है। महापौर या नगर आयुक्त को शहर के इस सबसे बड़े आयोजन को लेकर दौरा करने की फुरसत नहीं मिल पा रही है।
महापौर और नगर आयुक्त शहर के सफाई अभियान में शामिल होने की फोटो तो खिंचवा रहे हैं, लेकिन इस महीनेभर चलने वाले लक्खी मेले की ओर उनका ध्यान नहीं है।
रामलीला कमेटी ने करीब एक माह पहले ही महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह और नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य को पत्र देकर रामलीला मैदान और राम बरात शोभायात्रा मार्ग का निरीक्षण करने और आवश्यक सुधार कार्य शुरू कराए जाने का अनुरोध किया था।
रामलीला महोत्सव 25 सितम्बर को अनंत चतुर्दशी को मुकुट पूजन के साथ शुरू हो जाएगा। अगले दिन से शोभायात्राएं शुरू हो जाएंगी और 30 सितम्बर से रामलीला मैदान में प्रतिदिन लीलाओं का मंचन शुरू हो जाएगा। महोत्सव शुरू होने में महज चार दिन रह जाने पर भी मेयर या नगर आयुक्त को इसकी सुध नहीं आई है।
गौरतलब है कि रामलीला मैदान और शोभायात्रा मार्ग में सुधार संबंधी कार्य नगर निगम द्वारा हर वर्ष समय रहते शुरू करा दिए जाते हैं। मेयर और नगर आयुक्त स्वयं अधीनस्थ अधिकारियों को साथ लेकर दौरा करते हैं। इससे कार्य द्रुत गति से शुरू हो जाते थे। लेकिन मेयर और नगर आयुक्त की उदासीनता को देखते हुए विभाग अभी तक सक्रिय नहीं हुआ है। रामलीला मैदान में काफी सुधारात्मक कार्य होने शेष हैं।
एक ओर जिलाधिकारी मनीष बंसल रामलीला कमेटी और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर चुके हैं। पुलिस, प्रशासन शोभायात्रा मार्ग का दौरा कर व्यवस्थाओं की तैयारी में जुट गया है, दूसरी ओर नगर निगम ने ढुलमुल रवैया अपना रखा है।
भगवान राम के नाम पर वोटों की राजनीति करने वाली भारतीय जनता पार्टी की महापौर रामलीला महोत्सव के लिए समय नहीं निकाल पा रही हैं। बता दें कि महापौर ने पिछले दिनों जनकपुरी क्षेत्र में 12 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का शिलान्यास किया था, लेकिन वहां भी अभी तक अधिकांश कार्य आगे नहीं बढ़ सके हैं। सूत्रों का दावा है कि इन कार्यों का शिलान्यास कुछ दिन पहले ही होना था, लेकिन महापौर के यहां फाइलें अटकी रहने के कारण इसमें समय लगा।
रामलीला मैदान जगह-जगह गड्ढे बने हुए है, जिनमें वर्षा का पानी भरा हुआ है। इन्हें समय रहते समतल किए जाने की जरूरत है। पिछली बार हटा दिए गए झुग्गी-झोंपड़ी वालों ने फिर से मैदान के एक बड़े हिस्से पर कब्जा जमा लिया है। राम मंच के आसपास जीर्णोद्धार कार्य होना शेष है। यहां रेत के ढेर लगे हुए हैं। पैदल चलना भी मुश्किल है। मैदान के प्रवेश द्वारों और नालों की दीवारों की भी मरम्मत होनी है। रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंची हुई हैं कि आखिर ये कार्य कब होंगे?
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