आगरा में सवर्णों का सत्याग्रह: यूजीसी नियम वापसी और आरक्षण खत्म करने की मांग, मंच पर ही ब्राह्मण-क्षत्रिय में छिड़ी तकरार

आगरा, 05 सितंबर। शहीद स्मारक पर शनिवार की सुबह सवर्ण समाज के संगठनों का सत्याग्रह शुरू हुआ। हाथों में मांगों से जुड़ी तख्तियां लेकर पहुंचे कार्यकर्ताओं ने यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने और आरक्षण व्यवस्था को खत्म करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि यूजीसी के हालिया फैसलों से सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव हो रहा है।
लेकिन सत्याग्रह के दौरान ही दो गुटों में विवाद हो गया। दोपहर करीब दो बजे आंदोलन का नेतृत्व कर रहे एक ब्राह्मण नेता ने मंच से पांच ब्राह्मण नेताओं के नाम लिए। इस पर क्षत्रिय समाज के लोग नाराज हो गए। उनका कहना था कि यह सिर्फ ब्राह्मणों का आंदोलन नहीं है, इसमें क्षत्रिय समाज, करणी सेना, क्षत्रिय महासभा समेत 15 संगठन शामिल हैं।
क्षत्रिय समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। मंच से भाजपा विधायक रानी पक्षालिका सिंह पर गलत टिप्पणी की गई। इसी बात को लेकर दोनों गुटों में बहस हो गई। विवाद बढ़ने पर क्षत्रिय समाज के लोग कार्यक्रम छोड़कर गेट के बाहर चले गए। आंदोलन दो हिस्सों में बंट गया।
करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजीव चौहान ने कहा कि यह सभी सवर्णों का सत्याग्रह है। रानी पक्षालिका पर टिप्पणी की गई, किसी भी नेता पर टीका-टिप्पणी ठीक नहीं है। क्षत्रिय समाज नाराज नहीं है, सभी लोग यहीं हैं, कोई कहीं नहीं जा रहा। लेकिन मंच से सिर्फ ब्राह्मण नेताओं का नाम लेना ठीक नहीं है।
सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे अरुण उपाध्याय ने कहा कि यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है। ये अनिश्चितकाल तक चलेगा। सरकार से हमारी चार प्रमुख मांगें हैं - सरकार जातिवाद फैलाना बंद करे, सवर्ण समाज पर दर्ज फर्जी मुकदमे रद्द हों, हमारे सवर्ण नेता बाहर निकलकर आएं। उन्होंने जेन-जी युवाओं से अपील की, "घरों से निकलो, बाहर निकलो और तानाशाह सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाओ।" जनसंगठन की छात्र राष्ट्रीय अध्यक्ष नंदनी भारद्वाज ने कहा, "यूजीसी का फैसला वापस लेना ही होगा। आरक्षण में बदलाव जरूरी है। मेरिट को नजरअंदाज कर आरक्षण देना युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है।"
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