उपभोक्ता आयोग प्रथम का फैसला: गोदरेज प्रॉपर्टीज को 90 दिन में फ्लैट का कब्जा देने का आदेश, दो लाख हर्जाना भी
आगरा, 04 सितंबर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम ने होम बायर्स के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने सेवा में कमी मानते हुए गोदरेज प्रॉपर्टीज लिमिटेड और उसके सहयोगी डेवलपर्स को 90 दिनों के भीतर फ्लैट का कब्जा देने और रजिस्ट्री करने का आदेश दिया है। साथ ही बिल्डर पर दो लाख रुपये हर्जाना और 20 हजार वाद-व्यय भी लगाया है।
क्या है पूरा मामला
आगरा के ओल्ड ईदगाह कॉलोनी निवासी अश्विनी जैन और उनकी पत्नी कनुप्रिया जैन ने गोदरेज की नोएडा सेक्टर-150 स्थित आवासीय परियोजना ‘गोदरेज नेस्ट’ में टावर ए-1 में यूनिट नंबर 1803 बुक की थी। आवंटन पत्र 27 फरवरी, 2018 को जारी हुआ था और फ्लैट की कुल कीमत 76,71,118 रुपये तय हुई थी।
पेमेंट प्लान के मुताबिक परिवादियों ने 05 दिसंबर, 2019 तक कुल 32,07,577 रुपये बिल्डर के पास जमा कर दिए। एग्रीमेंट के अनुसार बिल्डर को 31 दिसंबर, 2022 तक निर्माण पूरा कर कब्जा देना था।
बिल्डर ने मनमाने ढंग से रद्द किया आवंटन
समय पर निर्माण पूरा नहीं हुआ, उल्टे बिल्डर ने 31 अक्टूबर, 2022 को एक निरस्तीकरण पत्र जारी कर मनमाने ढंग से फ्लैट का आवंटन रद्द कर दिया और जमा की गई पूरी रकम जब्त कर ली। पीड़ित दंपति ने इसके खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
आयोग ने माना सेवा में कमी
अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने सुनवाई के बाद बिल्डर की इस कार्रवाई को सेवा में गंभीर कमी माना और निरस्तीकरण पत्र को निरस्त कर दिया।
आयोग का आदेश:
1. बिल्डर 90 दिनों के भीतर फ्लैट का निर्माण मानकों के अनुरूप पूरा कर कब्जा सौंपे और विक्रय विलेख (रजिस्ट्री) निष्पादित करे।
2. परिवादियों द्वारा जमा 32,07,577 रुपये पर छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज जोड़ते हुए उसे फ्लैट की मूल कीमत में समायोजित किया जाए।
3. मानसिक और आर्थिक पीड़ा के लिए 2,00,000 रुपये हर्जाना और 20,000 रुपये वाद-व्यय अलग से दे।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बिल्डर 90 दिनों में आदेश का पालन नहीं करता है, तो उसे 6 प्रतिशत के स्थान पर नौ प्रतिशत वार्षिक दंड ब्याज देना होगा।
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