बैंक यूनियन करेंगी अनिश्चितकालीन हड़ताल!

आगरा, 24 अगस्त। बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के संयुक्त मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर देशव्यापी आंदोलन की तैयारी कर ली है। यूएफबीयू ने आगामी 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है। इससे पहले 11 सितंबर को एक दिवसीय तथा 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल की जाएगी।
यूएफबीयू की प्रमुख मांगों में सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग लागू करना, पीएलआई की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव तथा पेंशन सहित अन्य लंबित मुद्दों का समाधान शामिल है।
पीएलआई व्यवस्था पर क्यों है आपत्ति?
यूएफबीयू के अनुसार, वर्तमान पीएलआई व्यवस्था में बैंक के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को बैंक के सामूहिक प्रदर्शन के आधार पर समान रूप से पीएलआई देने की व्यवस्था थी। लेकिन सरकार की नई व्यवस्था में स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम 365 दिनों के बेसिक पे तक पीएलआई का प्रावधान किया गया है, जबकि कर्मचारियों और स्केल-III तक के अधिकारियों के लिए अधिकतम 15 दिन के बेसिक पे+ डीए तक पीएलआई है। सरल शब्दों में कहें तो एक ही बैंक में काम करने वाले अधिकांश कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए पीएलआई अधिकतम 15 दिन के वेतन तक है, जबकि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के लिए यह 365 दिन तक हो सकती है। यूएफबीयू का कहना है कि यह अंतर 20 गुना से भी अधिक है और इससे बैंकिंग क्षेत्र में कर्मचारियों के बीच असमानता और विभाजन बढ़ सकता है। 
गौरतलब है कि बैंकों में सबसे अधिक संख्या स्केल एक से तीन अधिकारियों की है जो शाखा स्तर पर बैंकिंग करते हैं। यूनियन का कहना है कि वह पीएलआई के खिलाफ नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था चाहती है जो निष्पक्ष हो और बैंक के सामूहिक प्रदर्शन पर आधारित हो।
यूएफबीयू ने सरकार से मौजूदा योजना को फिलहाल रोककर यूनियनों के साथ बातचीत के माध्यम से संशोधित व्यवस्था तैयार करने की मांग की है।
यूएफबीयू के अनुसार, पांच दिन की बैंकिंग का प्रस्ताव मार्च, 2024 के द्विपक्षीय समझौते में शामिल था और सरकार को भेजे जाने के बावजूद दो वर्ष से अधिक समय से लंबित है।
आईबोक के प्रदेश उपाध्यक्ष अंकित सहगल ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच समानता, सम्मानजनक कार्य वातावरण और न्यायपूर्ण व्यवस्था जरूरी है। यूनियन चाहती है कि सभी लंबित मुद्दों का समाधान बातचीत के माध्यम से किया जाए। मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने पर घोषित आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बैंक ग्राहकों से अपील की कि संभावित हड़ताल के दिनों को ध्यान में रखते हुए अपनी आवश्यक बैंकिंग गतिविधियों की पहले से योजना बना लें।
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