तेंदुओं की खालों की तस्करी किसने कराई, जांच में फंसा पेंच, पकड़े गए अभियुक्तों ने लिया वाइल्डलाइफ एसओएस प्रमुख का नाम, कार्तिक का आरोपों से इनकार
आगरा, 18 अगस्त। मध्य प्रदेश राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) द्वारा तेंदुए की खालों की तस्करी की जांच में वाइल्डलाइफ एसओएस पर उठाए गए सवाल पर पेंच फंसता नजर आ रहा है।
एक ओर एसटीएसएफ द्वारा कहा जा रहा है कि पिछले महीने 23 जुलाई को सैंया से चार तस्करों से जब्त की गई तेंदुए की दस खालों के मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों ने वाइल्डलाइफ एसओएस के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण का नाम लिया है।
दूसरी ओर वाइल्डलाइफ एसओएस से जुड़े सूत्रों का दावा है कि आरोपियों की गिरफ्तारी संस्था की शिकायत पर ही की गई थी। चूंकि गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश में हुई और इससे मध्य प्रदेश प्रशासन पर सवाल उठे तो उससे बचने के लिए वाइल्डलाइफ एसओएस का नाम घसीटा जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश के अधिकारी इस बिंदु पर भी जांच कर रहे हैं कि क्या वाइल्डलाइफ एसओएस ने अपनी छवि और धन जुटाने के लिए शिकार का आयोजन कर जब्ती का ‘नाटक’ किया था। हालांकि संस्था ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह वन विभाग को पूरी तरह सहयोग कर रहा है। समझा जाता है अतिशीघ्र वाइल्डलाइफ एसओएस अपना विस्तृत पक्ष रख सकती है।
बता दें कि सैंया से 23 जुलाई को ग्वालियर-आगरा हाईवे स्थित एक होटल से चार लोगों को तेंदुए की दस खालों के साथ गिरफ्तार किया गया था। उस समय वाइल्डलाइफ एसओएस ने अपनी फारेस्ट वाच एंटी-पोचिंग यूनिट की महीनों की निगरानी का श्रेय लिया था। तेंदुए की खालें मध्य प्रदेश से जुड़ी थीं, इसलिए मध्य प्रदेश की एसटीएसएफ ने भी जांच शुरू की।
जांच में शिवपुरी और मुरैना के जंगलों में तेंदुओं के अवशेष मिले, जिन्हें डीएनए जांच के लिए देहरादून भेजा गया। इस मामले में भगवान सिंह उर्फ सलीम और उनके सहयोगी वसीम को गिरफ्तार किया गया।
हिरासत के दौरान बयान में उन्होंने बताया वे सीईओ कार्तिक सत्यनारायण के निर्देश पर काम कर रहे थे। एसटीएसएफ ने सत्यनारायण को विगत दिवस शिवपुरी में जांच अधिकारी के सामने पेश होने का नोटिस भेजा है। जांच अधिकारियों का दावा है कि पर्याप्त डिजिटल साक्ष्य मिले हैं जो इस आपरेशन को निजी लाभ से जोड़ते हैं। मध्य प्रदेश की मुख्य वन्यजीव संरक्षक समीता राजौरा ने कहा कि दोनों मुख्य आरोपियों ने वाइल्डलाइफ एसओएस के पेरोल पर होने की बात कही है। हालांकि वाइल्डलाइफ एसओएस ने 17 अगस्त को जारी बयान में आरोपों को खारिज किया। सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास जताया है।
इस बारे में डीएफओ राजेश कुमार ने मीडिया से कहा कि मध्य प्रदेश एसटीएसएफ ने वाइल्डलाइफ एसओएस के खिलाफ कुछ साक्ष्य मिलने की बात कही है।
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