रिश्ते तार-तार: बेटों ने जिंदा बाप को मृत दर्शा कर हड़प ली करोड़ों की जमीन, सच सामने आने पर जहर देकर जान से मारने की साजिश!

आगरा, 19 जुलाई। फतेहाबाद क्षेत्र में रिश्तों को तार-तार कर देने वाला सनसनीखेज और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। संपत्ति और जमीन पाने के लालच में दो सगे बेटों ने अपने जीवित पिता को सरकारी कागजों में ‘मृत’ घोषित करवा दिया। इस जालसाजी के सहारे बेटों ने पिता के मालिकाना हक वाली करोड़ों रुपये मूल्य की कृषि भूमि को अपने नामों पर ट्रांसफर करवा लिया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को तहसील में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस में 70 वर्षीय बुजुर्ग परसादी लाल खुद को जीवित बताते हुए अधिकारियों के सामने न्याय की गुहार लगाने पहुंचा। पूरा मामला जानकर वहां मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। पीड़ित पिता ने अपने बेटों पर न केवल घर से बेदखल करने, बल्कि सच सामने आने पर जहर देकर जान से मारने की साजिश रचने का भी आरोप लगाया।
ताजगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत गांव बिल्लोचपुरा के मूल निवासी परसादी (70) पुत्र सुखलाल ने शनिवार को सम्पूर्ण समाधान दिवस में उपस्थित होकर तहसीलदार को शिकायती पत्र सौंपा। पीड़ित ने बताया कि मौजा सारंगपुर, तहसील फतेहाबाद में उसके नाम से गाटा संख्या 165 रकबा 2.0670 हेक्टेयर तथा गाटा संख्या 91 रकबा 1.5090 हेक्टेयर अत्यंत उपजाऊ कृषि भूमि सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज थी। लगभग 25 वर्ष पूर्व परिवार के भरण-पोषण के लिए वे अपने गांव से मजदूरी करने पंजाब के लुधियाना शहर चले गए थे, जहां वे लंबे समय तक मेहनत-मजदूरी करते रहे। इसी लंबी अनुपस्थिति का अनुचित लाभ उठाते हुए उनके दोनों सगे बेटों ने स्थानीय स्तर पर साठगांठ कर राजस्व अभिलेखों में अपने पिता को मृत घोषित करवा दिया। परसादी का नाम विरासत के नाम पर सरकारी खतौनी से पूरी तरह कटवाकर दोनों बेटों ने उस पूरी पैतृक भूमि को कानूनी रूप से अपने-अपने नामों पर दर्ज करा लिया। 
हाल ही में जब परसादी पंजाब से वापस अपने पैतृक गांव लौटे, तो उन्हें इस धोखाधड़ी की जानकारी हुई। बुजुर्ग ने स्पष्ट किया कि वे शारीरिक व मानसिक रूप से पूरी तरह जीवित हैं। उन्होंने जीवन में कभी भी अपनी इस पैतृक भूमि का न तो कोई विक्रय किया है और न ही किसी के पक्ष में कोई वसीयतनामा निष्पादित किया है।
वृद्ध पिता ने शिकायती पत्र में बेटों की क्रूरता का वर्णन करते हुए बताया कि जब उन्होंने अपने जीवित होने का दावा किया और बेटों से अपनी मेहनत की जमीन वापस मांगी, तो दोनों बेटों ने मर्यादाओं को ताक पर रखकर उन्हें लाठियों के बल पर घर से बाहर खदेड़ दिया। बेटों ने उन्हें भोजन और पानी देना तक बंद कर दिया। पीड़ित का आरोप है कि अब उनके दोनों बेटे इस अपराध को छिपाने के उद्देश्य से उन्हें रास्ते से हटाने के लिए खाने में जहर देकर जान से मारने की खुली धमकियां दे रहे हैं। इस भयानक प्रताड़ना के कारण बुजुर्ग इस ढलती उम्र में अपने ही घर-परिवार से बेदखल होकर रिश्तेदारों के यहाँ और सड़कों पर लावारिसों की तरह जीवन यापन करने को विवश हैं।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तहसीलदार ने पीड़ित बुजुर्ग को त्वरित सुरक्षा का भरोसा दिया। उन्होंने राजस्व निरीक्षकों और क्षेत्रीय पुलिस को तुरंत मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करने तथा तीन कार्यदिवस के भीतर जांच आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए।
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