एलआईसी को डेढ़ लाख से अधिक राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश, उपभोक्ता आयोग प्रथम का फैसला
आगरा, 18 जुलाई। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार संव्यवहार का दोषी मानते हुए परिवादिनी अंजली जैन को 1,45,620 रुपये की बकाया धनराशि छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ अदा करने का आदेश दिया है।
यह मामला 23 दिसंबर 2023 को दायर किया गया था। कमला नगर की निवासी अंजली जैन ने 26 सितंबर 2003 को एलआईसी से पांच लाख रुपये की बीमित राशि वाली एक पॉलिसी खरीदी थी। इस पॉलिसी का वार्षिक प्रीमियम 31,986 रुपये था और यह 20 वर्ष की अवधि पूर्ण होने पर वर्ष 2023 में परिपक्व होनी थी।
पॉलिसी की शर्तों के अनुसार, परिवादिनी को लाभ वापसी के संबंध में दो विकल्प दिए गए थे। प्रथम विकल्प के तहत प्रत्येक दूसरे वर्ष बीमित राशि की दो प्रतिशत धनराशि वापस होनी थी। द्वितीय विकल्प के तहत यदि प्रथम विकल्प नहीं चुना जाता है, तो परिपक्वता राशि के साथ प्रत्येक दो वर्ष में 2 प्रतिशत के हिसाब से बन रही पूरी धनराशि जोड़कर दी जानी थी। पॉलिसी खरीदते समय भूलवश परिवादिनी द्वारा किसी भी विकल्प का चयन नहीं किया गया था। एलआईसी ने परिपक्वता के समय परिवादिनी को कुल 12,00,000 रुपये का भुगतान किया।
परिवादिनी ने जब संपर्क किया तो पता चला कि उनके पति द्वारा खरीदी गई बिल्कुल वैसी ही पॉलिसी पर एलआईसी ने 13,45,620 रुपये का भुगतान किया था। एलआईसी का तर्क था कि विकल्प न चुनने के कारण उन्हें 1,45,620 रुपये का कम भुगतान किया गया है।
आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि विकल्प चयन न करने की स्थिति में एलआईसी को स्वयं ही प्रत्येक दो वर्ष बाद 2 प्रतिशत राशि का भुगतान करना चाहिए था, जो उन्होंने नहीं किया।
आयोग ने माना कि एलआईसी ने परिवादिनी को मिलने वाली लाभ की धनराशि को 20 वर्ष तक अपने कार्यों में प्रयोग किया, जो अनुचित व्यापार संव्यवहार और सेवा में कमी है। आयोग ने 15 जुलाई 2026 को सुनाए गए अपने निर्णय में एलआईसी को आदेश दिया कि वह 45 दिनों के भीतर 1,45,620 रुपये की शेष राशि 28 सितंबर 2023 से वास्तविक अदायगी तक छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ जिला आयोग के खाते में जमा करे।
इसके अतिरिक्त, आयोग ने मानसिक पीड़ा के लिए 10,000 रुपये और वाद व्यय के रूप में 5,000 रुपये का भुगतान करने का भी निर्देश दिया है। यदि एलआईसी 45 दिन के भीतर भुगतान करने में चूक करती है, तो उसे छह प्रतिशत के स्थान पर नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा।
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