दीवानी न्यायालय परिसर में कॉकरोच बन जमीन पर रेंगते हुए पहुंचा निलंबित फायरमैन

आगरा, 08 जून। दीवानी न्यायालय परिसर में सोमवार की सुबह अजीब घटना हुई। एक निलंबित फायरमैन कॉकरोच की वेशभूषा पहनकर जमीन पर रेंगते हुए अदालत की ओर बढ़ता दिखाई दिया। फायरमैन जितेंद्र राठौर अपने ऊपर दर्ज मुकदमे को फर्जी बताते हुए न्याय की मांग करने आया था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जितेंद्र का कहना था कि वह पिछले दो वर्षों से न्याय के लिए विभिन्न सरकारी कार्यालयों और अधिकारियों के चक्कर काट रहा है लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। इसी पीड़ा और विरोध को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाने के लिए उन्होंने कॉकरोच का रूप धारण किया।
कॉकरोच की वेशभूषा में प्रदर्शन कर रहे जितेंद्र राठौर को दीवानी परिसर की सुरक्षा में तैनात एसएसएफ जवानों ने मुख्य प्रवेश द्वार पर ही रोक लिया। इसके बाद उन्होंने वहीं खड़े होकर अपनी मांगें रखीं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने की अपील की।
जितेंद्र राठौर ने बताया कि वर्ष 2024 में थाना न्यू आगरा में उनके खिलाफ एक छात्रा से कथित गलत हरकत करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। उनका दावा है कि जिस समय घटना बताई गई, उस समय वह दूसरे जिले में सरकारी ड्यूटी पर तैनात थे।
उन्होंने कहा कि आईजीआरएस पोर्टल पर हुई जांच में पुलिस ने उन्हें अपराधी नहीं मानने संबंधी रिपोर्ट भी दी थी, लेकिन इसके बावजूद मुकदमे की तलवार उनके सिर पर लटकी हुई है।
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उनका आरोप है कि शिक्षा माफिया के खिलाफ आवाज उठाने और कुछ प्रभावशाली लोगों का विरोध करने की वजह से उन्हें साजिशन फंसाया गया।
जितेंद्र के अनुसार, मुकदमे के चलते उन्हें 15 फरवरी 2026 को सेवा से निलंबित कर दिया गया। इसका सीधा असर उनके करियर और आर्थिक स्थिति पर पड़ा। उन्होंने बताया कि उन्होंने यूजीसी-नेट (गणित) जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा भी उत्तीर्ण की है, लेकिन मुकदमे की वजह से उन्हें रोजगार और अन्य अवसरों में नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि झूठे आरोपों के कारण सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्रभावित हुई है और परिवार को भी मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है।
जितेंद्र राठौर ने मांग की कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि आरोप झूठे साबित होते हैं तो साजिश रचने वाले लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, तब तक वह अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
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