नई दिल्ली, 25 जून। दक्षिण अमेरिकी राज्य वेनेजुएला में एक मिनट के भीतर आए दो शक्तिशाली भूकंप के झटकों से भारी नुकसान हुआ है। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) के अनुमान के अनुसार भूकंप में मरने वालों का आंकड़ा दस हजार से ज्यादा हो सकता है। बताया जा रहा है कि यह भूकंप पिछली एक सदी में आए सबसे शक्तिशाली भूकंप में से एक है। सैकड़ों इमारतें ध्वस्त हुई हैं, एयरपोर्ट को भी नुकसान पहुंचा है।
उधर जापान के उत्तरी हिस्से में भी धरती कांपी है। गुरुवार को जापान में 6.9 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। जापान की मौसम एजेंसी ने बताया कि इसके झटके सैकड़ों किलोमीटर दूर राजधानी टोक्यो तक महसूस किए गए। राहत की बात यह है कि जापानी अधिकारियों ने किसी की जान जाने की खबर नहीं दी है।
न्यूज चैनल 'एबीपी न्यूज' के मुताबिक, वेनेजुएला की राजधानी काराकस से लेकर अलग-अलग शहरों से सामने आए वीडियो में तबाही का खौफनाक मंजर देखने को मिल रहा है। यूएसजीएस ने कहा, आपदा के चलते भारी जानमाल के नुकसान की आशंका है। उसने शुरुआती अनुमान लगाया है कि मृतकों की संख्या दस हजार से एक लाख के बीच हो सकती है। अधिकारियों ने अभी तक मृतकों या घायलों की संख्या जारी नहीं की, लेकिन स्थानीय अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने ढहती इमारतों, बचाव कार्यों और घायलों की बढ़ती संख्या की जानकारी दी।
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, पहले भूकंप की तीव्रता 7.1 थी और इसका केंद्र  कैरिबियाई तट पर स्थित मोरोन बस्ती के पश्चिम में था। कराकस से इसकी दूरी करीब 168 किलोमीटर है। इसकी गहराई 13 किलोमीटर थी। वहीं, दूसरे भूकंप की तीव्रता 7.5 तीव्रता मापी गई। इसका केंद्र मोरोन से 16 किलोमीटर दूर दक्षिण-पश्चिम में था। दूसरे भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर थी। 
इस भूकंप के इतने ज्यादा असरदार होने की बड़ी वजह इसकी गहराई है। दोनों भूकंप जमीन की सतह से सिर्फ 10 से 13 किलोमीटर की गहराई पर आए, जिसे भूकंप विज्ञान में बहुत कम गहराई माना जाता है। जब भूकंप का केंद्र इतना सतह के पास होता है तो जमीन के ऊपर झटके बहुत ज्यादा तेज महसूस होते हैं, क्योंकि ऊर्जा को ऊपर तक पहुंचने में कम दूरी तय करनी पड़ती है और रास्ते में कम ऊर्जा खत्म होती है। यही वजह रही कि काराकास और आसपास के इलाकों में इमारतें हिलीं और कई ढह गईं। चेतावनी दी गई है कि आगे और झटके (आफ्टरशॉक) आ सकते हैं, जिनमें से कुछ तेज भी हो सकते हैं।
वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने इस आपदा के बाद देश में इमरजेंसी की घोषणा कर दी है।
वेनेजुएला उस इलाके में आता है, जहां कैरिबियन प्लेट और दक्षिण अमेरिकी प्लेट आपस में मिलती हैं, इसलिए यहां भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है. यूएसजीएस के मुताबिक साल 1812 में काराकास और मेरिदा में आए भूकंप में करीब 30 हजार लोगों की जान गई थी।
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भारत में भी कांपी धरती, पुलवामा में 
घरों से बाहर भागे दहशतजदां लोग
इस बीच भारत में भी जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आज गुरुवार की सुबह 3.5 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके बाद लोगों में डर बैठ गया। इस भूकंप से किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) के अनुसार, जम्मू-कश्मीर, असम और मेघालय क्षेत्र में अलग-अलग तीव्रता के झटके रिकॉर्ड किये गए। राहत की बात रही कि किसी तरह के जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। हालांकि, लोग सहम गए और घरों से बाहर भागे। 
एनसीएस के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 25 जून को देर रात 2:30 बजे भूकंप के झटके महसूस किये गए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.5 मापी गई। भूकंप का केंद्र पुलवामा क्षेत्र के पास 33.913° उत्तर अक्षांश और 75.095° पूर्व देशांतर पर था और जमीन से इसकी गहराई लगभग 15 किलोमीटर नीचे थी। रात में आये इस झटके से कुछ लोग डर से घरों से निकल गए। हालांकि, किसी जान-माल के नुकसान की कोई खबर अभी तक नहीं है. 
इससे पहले 24 जून की रात 12:34 बजे असम के गोलपाड़ा जिले में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिसकी रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.7 मापी गई। इसका केंद्र गोलपाड़ा क्षेत्र के पास था, जिसकी जमीन से गहराई 12 किलोमीटर नीचे थी. राहत की बात ये रही कि इस भूकंप से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ। 24 जून को ही मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स जिले में सुबह 8:08 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए थे, जिसकी रिक्टर स्केल पर तीव्रता 2.9 मापी गई। कम तीव्रता होने के कारण अधिकतर लोगों को झटके महसूस नहीं हुए।
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