जलकल विभाग आगरा के महाप्रबंधक पर लगे घोटालों के आरोप, जांच टीम के सामने आने से इंकार, नगर आयुक्त ने वित्तीय अधिकार सीज करने के लिए शासन को लिखा

आगरा, 21 अप्रैल। नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने शहर के जलकल विभाग के महाप्रबंधक अरुणेंद्र कुमार राजपूत के वित्तीय अधिकार सीज करने की संस्तुति शासन को भेज दी है, जिससे जलकल विभाग में हड़कंप मच गया है।
महाप्रबंधक पर पाइपलाइन लीकेज और नई लाइन बिछाने के नाम पर करोड़ों रुपये के घोटाले, फाइलों के गायब होने और नियमों की खुली अनदेखी के आरोप लगे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जलकल विभाग के पास शहर में करीब 1600 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन की मरम्मत और नई लाइन बिछाने का जिम्मा था। आरोप है कि विभाग ने स्वयं निर्धारित दरों पर खरीद-फरोख्त कर भुगतान किया और इसी आड़ में चार करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला किया गया।
शहरवासियों की ओर से पिछले एक वर्ष से लगातार शिकायतें दर्ज कराई जा रही थीं, लेकिन महाप्रबंधक ने उन्हें नजरअंदाज करते हुए कई शिकायतों को फर्जी बताकर खारिज कर दिया। इन मामलों की शिकायतें बढ़ीं तो नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच समिति गठित की। समिति ने संबंधित फाइलें मांगीं, लेकिन महाप्रबंधक द्वारा कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। यहां तक कि जांच टीम के सामने उपस्थित होने से भी इनकार कर दिया। समिति ने संकलित साक्ष्यों के आधार पर रिपोर्ट नगर आयुक्त को सौंपी, जिसके बाद नगर आयुक्त द्वारा वित्तीय अधिकार सीज करने के लिए शासन को लिखने की कार्रवाई की गई।
बताया गया है कि जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। रेन वाटर हार्वेस्टिंग में करीब 2.5 करोड़ रुपये का गोलमाल हुआ। लखनऊ की तीन कंपनियों से 80 लाख रुपये के स्लूज वाल्व की खरीद दिखाई गई। एक ही तारीख में 40 लाख रुपये के वाल्व दिखाकर 5-5 लाख रुपये की फाइलों से भुगतान किया गया। पाइपलाइन मरम्मत और नई लाइन बिछाने में करीब 1 करोड़ रुपये के भुगतान का हुआ पर इनका सत्यापन नहीं किया गया। विभाग में केवल निर्माण कार्य ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी अनियमितताओं की लंबी सूची सामने आई। सेवानिवृत्त सहायक अभियंता राजकुमार शर्मा को 18 वर्ष बाद भी पेंशन व बकाया भुगतान नहीं हुआ। मृतक आश्रित भर्ती में रजनीश शर्मा, चरणजीत और ललित दक्ष के प्रमोशन पर जांच कमेटी ने सवाल उठाये हैं। सुमित पचौरी की नियुक्ति की फाइल गायब, फिर भी जेई के रूप में कार्य कर रहे हैं। हन्ना गली छीपीटोला निवासी कैलाश चंद्र ने चमरौली क्षेत्र में पाइपलाइन कार्य के लिए 20 लाख रुपये के भुगतान का सत्यापन न होने की शिकायत की। ऐसे कई मामलों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महाप्रबंधक अरुणेंद्र राजपूत पर जनप्रतिनिधियों की बातों को नजरअंदाज करने और विभाग में तानाशाही रवैया अपनाने के आरोप भी लगे हैं। नगर आयुक्त द्वारा उठाए गए कदम के बाद अब निगाहें शासन के अगले फैसले पर टिकी हैं।
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