आगरा में सड़क सुरक्षा की भयावह स्थिति, जिला रोड सेफ्टी कमेटी तत्काल कार्रवाई करे, हादसों पर उभरा डॉ संजय चतुर्वेदी का दर्द

आगरा, 23 अप्रैल। वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ और जिला सड़क सुरक्षा समिति के पूर्व सदस्य डॉ संजय चतुर्वेदी ने जिला प्रशासन से सड़क सुरक्षा समिति बनाकर सड़कों पर चलने वालों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने अनेक सुझाव भी दिए हैं। 
डॉ चतुर्वेदी ने एक विज्ञप्ति में कहा कि हाल की घटना में मेट्रो निर्माण में लगी हाइड्रा क्रेन से एक महिला की मौत हो गई, उनकी बेटी सड़क पर चीखती रही। यह हमारे शहर में सड़क सुरक्षा की भयावह स्थिति को दिखाता है।
सुप्रीम कोर्ट की “Committee on Road Safety” के स्पष्ट निर्देश हैं कि हर ज़िले में District Road Safety Committee (DRSC) बनाई जाए, जिसकी अध्यक्षता ज़िलाधिकारी करें और यह कमेटी हर तिमाही दुर्घटनाओं की समीक्षा करके कम से कम 10% वार्षिक कमी का लक्ष्य तय करे।
साथ ही, पैदल यात्रियों और दो‑पहिया चालकों की मौतों को प्राथमिकता से घटाने के लिए “ब्लैक स्पॉट” पर विशेष कार्रवाई अनिवार्य है। देश में हर पाँचवीं सड़क‑मौत एक पैदल यात्री की है और लगभग आधी मौतें दोपहिया चालकों की होती हैं। यह सिर्फ़ हाईवे की नहीं, शहर के अंदर की सड़कों की भी त्रासदी है।
हमारे शहर में भी सड़क किनारे निर्माण‑कार्य, टूटी/घिरी फुटपाथ, गति‑नियंत्रण की कमी और बिना सुरक्षा‑प्रबंधन के भारी मशीनरी का इस्तेमाल पैदल यात्रियों व स्कूटर सवारों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।
उन्होंने अनुरोध किया कि जिला रोड सेफ्टी कमेटी की अगली बैठक तुरंत बुलाई जाए (अधिमानतः 15 दिन के भीतर) और इस दुर्घटना व ऐसे सभी “ब्लैक स्पॉट” पर विशेष एजेंडा रखा जाए।
शहर के अंदर जिन मार्गों पर मेट्रो/फ्लाईओवर/अन्य निर्माण चल रहा है, वहां मानक बैरिकेडिंग, स्पष्ट साइन, रिफ्लेक्टिव टेप व रात में पर्याप्त लाइटिंग, निर्धारित मार्ग से ही भारी मशीनरी की आवाजाही, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित, अलग कॉरिडोर और स्पीड‑कैल्मिंग (रंबल स्ट्रिप, स्पीड टेबल आदि) अनिवार्य किए जाएँ।
शहर के उन चौराहों/सड़कों की सूची तैयार की जाए जहाँ पिछले 1–2 वर्ष में सबसे ज़्यादा पैदल यात्री और टू‑व्हीलर मौतें हुई हैं, और हर स्थल के लिए समय‑बद्ध सुधार‑योजना (इंजीनियरिंग + एन्फोर्समेंट + पब्लिक अवेरनेस) सार्वजनिक की जाए।
DRSC बैठक की कार्यवाही (Minutes) और तय की गई कार्य‑योजना को ज़िला वेबसाइट व नोटिस बोर्ड पर अपलोड किया जाए, ताकि आम नागरिक भी मॉनिटर कर सकें।
स्कूल‑कॉलेज, रेज़िडेंशियल एरिया और हॉस्पिटल के आसपास “ज़ीरो टॉलरेंस ज़ोन” घोषित करके ओवर‑स्पीडिंग, गलत पार्किंग, हेलमेट/सीट‑बेल्ट उल्लंघन और नशे में ड्राइविंग पर सख़्त कार्रवाई की जाए।
हम सब नागरिक, डॉक्टर, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता इस प्रयास में ज़िला प्रशासन के साथ साझेदार बनना चाहते हैं। आपसे अपेक्षा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप ज़िला रोड सेफ्टी कमेटी को सक्रिय और जवाबदेह बनाकर शहर के अंदर सड़क‑सुरक्षा, खासकर पैदल यात्रियों और टू‑व्हीलर चालकों के लिए, तुरंत मज़बूत कदम उठाए जाएँ।
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