दो सप्ताह में क्यों मुक्त नहीं कराया राजा मंडी बाजार? आठ अफसरों को सुप्रीम कोर्ट का अवमानना नोटिस, सुनवाई चार मई को

आगरा, 11 अप्रैल। सर्वोच्च न्यायालय ने शहर के राजा मंडी बाजार के फुटपाथ और रास्ते को कब्जामुक्त नहीं करा पाने के मामले में प्रदेश के प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरु प्रसाद, आगरा के मंडलायुक्त नागेंद्र प्रताप, जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी सहित आठ अधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई चार मई को होगी।
गौरतलब है कि 79 साल पुराने राजा मंडी लाभ चंद्र मार्केट को लेकर वर्ष 2008 से भूमि और किराएदारी को लेकर विवाद चल रहा है। वर्ष 2025 में नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने लाभचंद्र मार्केट के भूमि के पट्टे को रद कर दिया। इसके बाद जनवरी 2026 में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया, इस मामले में दो फरवरी को डीएम ने जांच के बाद जमीन को सरकारी भूमि बताते हुए शपथ पत्र दाखिल किया था। सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त करने के लिए जिला प्रशासन को दो सप्ताह का समय दिया गया था।
जिला प्रशासन द्वारा कराई गई जांच में सामने आया कि लाभ चंद्र मार्केट में दो होटल और 70 दुकानें बनी हैं, इनके पिलर फुटपाथ और रोड पर हैं, टीम को इस संबंध में पुराने दस्तावेज भी मिले और कुछ दस्तावेज गायब भी मिले। 
निर्धारित समय में सरकारी जमीन पर किए गए कब्जे को न हटाए जाने पर याचिकाकर्ता अमरजोत सिंह सूरी ने अवमानना याचिका दायर की। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में इसकी सुनवाई हुई। 
सुप्रीम कोर्ट ने प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरु प्रसाद, मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप, डीएम अरविंद मल्लपा बंगारी, नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल, एडीएम प्रोटोकॉल प्रशांत तिवारी, एडीएम नागरिक एवं आपूर्ति अजय नारायण सिंह, एसडीएम सदर सचिन राजपूत, सहायक नगर आयुक्त श्रद्धा पांडेय को अवमानना का नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई चार मई को होगी।
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