अब चार नई स्वतः संज्ञान रिट याचिकाओं में होगी टीटीजेड की सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने 42 साल पुरानी रिट का किया औपचारिक समापन
आगरा, 17 अप्रैल। ताजमहल की सुरक्षा को लेकर वर्ष 1984 में शुरू हुई देश की सबसे लंबी पर्यावरणीय कानूनी लड़ाइयों में से एक टीटीजेड की लड़ाई अब नए चरण में प्रवेश कर गई है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में गठित पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली शामिल रहे, ने रिट याचिका संख्या 13381/1984 का औपचारिक समापन करते हुए ऐतिहासिक आदेश पारित किया। यह याचिका पर्यावरणविद् एम.सी. मेहता द्वारा दायर की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) से जुड़े मामलों को चार नई स्वतः संज्ञान रिट याचिकाओं में विभाजित किया जाए। ये हैं-
टीटीजेड के लिए विजन डॉक्यूमेंट – दीर्घकालिक विकास और संरक्षण योजना।
हरित आवरण और वृक्ष संरक्षण – पेड़ों और हरियाली से जुड़े मुद्दे।
उद्योगों का विनियमन – औद्योगिक गतिविधियों का नियंत्रण।
जल निकाय और सीवेज प्रबंधन – नदियों, नालों और तालाबों का संरक्षण।
ताजमहल से शुरू होकर व्यापक पर्यावरण आंदोलन बनी याचिका
इस याचिका की शुरुआत ताजमहल के संगमरमर पर पड़ रहे पीले और काले धब्बों की समस्या से हुई थी। आगरा क्षेत्र में फाउंड्री, रासायनिक उद्योग, ईंट-भट्टे, वाहनों का धुआं और मथुरा रिफाइनरी से निकलने वाले प्रदूषण को इसके लिए जिम्मेदार माना गया। समय के साथ यह मामला केवल ताजमहल की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विरासत संरक्षण, औद्योगिक नियंत्रण, शहरी नियोजन और पर्यावरणीय न्याय के व्यापक मुद्दों तक फैल गया। इसी केस के दौरान ‘प्रदूषणकर्ता भुगतान करे’ और ‘ऐहतियाती सिद्धांत’ जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों को न्यायिक मान्यता मिली।
क्यों लिया गया समापन का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस एक याचिका में 150 से अधिक लंबित अंतरिम आवेदन (आईए) हो चुके हैं, जिनमें विषयों की विविधता इतनी अधिक है कि एक ही मुकदमे में प्रभावी सुनवाई संभव नहीं रह गई थी।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह समापन पर्यावरण संरक्षण से पीछे हटना नहीं, बल्कि इन मुद्दों को अधिक केंद्रित, प्रभावी और संस्थागत ढांचे में आगे बढ़ाने की रणनीति है। न्यायालय ने एम.सी. मेहता के प्रयासों की सराहना करते हुए अमिकस क्यूरिया वरिष्ठ अधिवक्ता लिज मैथ्यू के सुझावों को स्वीकार किया।
डेढ़ सौ से अधिक लंबित आवेदनों के लिए तय प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने लंबित आवेदनों के निपटान के लिए स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित की, जिसके अनुसार 15 मई, 2026 तक अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड (AOR) को बताना होगा कि आवेदन प्रासंगिक है या नहीं। समयसीमा तक सूचना न मिलने पर आवेदन स्वतः निष्प्रभावी माना जाएगा। यदि आवेदन प्रासंगिक है तो यह बताना होगा कि वह किस नई याचिका में आता है। जिन मामलों पर सहमति होगी, उन्हें रजिस्ट्रार कोर्ट में अंतिम निपटान के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। विवादित मामलों की अलग से जांच होगी।
टैग्ड केस और अवमानना याचिकाओं पर भी निर्देश
पुरानी याचिका से जुड़े सभी टैग्ड केस और अपीलें भी इसी प्रक्रिया के तहत नई याचिकाओं में स्थानांतरित होंगी। अवमानना याचिकाओं को मुख्य न्यायाधीश के निर्देश के बाद अलग से सूचीबद्ध किया जाएगा।
पेड़ों की कटाई पर सख्त शर्तें लागू
पेड़ काटने या स्थानांतरित करने से जुड़े मामलों के लिए न्यायालय ने निर्देश दिया कि 30 अप्रैल, 2026 तक विस्तृत चार्ट अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा। इसमें परियोजना विवरण, पेड़ों की संख्या, प्रजाति और क्षतिपूरक वृक्षारोपण शामिल होगा। बिना चार्ट के याचिका सूचीबद्ध नहीं होगी।
पूर्व के आदेश रहेंगे प्रभावी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस याचिका के समापन के बावजूद पूर्व में दिए गए सभी आदेश और निर्देश प्रभावी बने रहेंगे। आवश्यकता पड़ने पर नई याचिकाओं में संशोधन या स्पष्टीकरण किया जा सकेगा।
अभी भी बड़े मुद्दे बाकी—यमुना और ट्रैफिक संकट
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने उपरोक्त जानकारी देते हुए कहा कि अभी दो बड़े मुद्दे बाकी हैं, जिनमें आगरा में भारी वाहनों का शहर के भीतर से गुजरना और यमुना नदी में गिरते नालों का प्रदूषण शामिल हैं। ये दो बड़े मुद्दे अब भी गंभीर बने हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट पहले ही 1996 और 2006 में भारी वाहनों को शहर से बाहर डायवर्ट करने के आदेश दे चुका है, लेकिन समस्या पूरी तरह हल नहीं हो सकी। यमुना नदी का प्रदूषण ताजमहल की संरचना, भूजल स्तर और पर्यावरण को सीधे प्रभावित कर रहा है। अब इन मुद्दों को नई स्वतः संज्ञान याचिकाओं में शामिल किया जाएगा।
अधिवक्ता जैन के अनुसार, अब पर्यावरणीय मुद्दों पर अलग-अलग और अधिक प्रभावी न्यायिक निगरानी होगी। ताजमहल की सुरक्षा, यमुना की सफाई, हरियाली संरक्षण और उद्योगों का संतुलित विकास, इन सभी पर अब केंद्रित कार्रवाई संभव होगी।
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