ताज महोत्सव में गूंजे होली और बसंत के स्वर
आगरा, 26 फरवरी। ताज महोत्सव का मुक्ताकाशीय मंच गुरूवार को ब्रज की रंगीली गली के रूप में दिखायी दिया। संस्कार भारती के तत्वावधान में मुक्काशीय मंच पर 'नादयज्ञ' का आयोजन किया गया। 'नादयज्ञ' में शास्त्रीय और लोक संगीत की मिलीजुली धारा प्रवाहित हुई। चेन्नई से आयीं दक्षिण भारतीय फिल्मों की गायिका सुश्री दीपिका वरदराजन ने ब्रजभाषा के पदों में शास्त्रीय गायन प्रस्तुत कर श्रोताओं को रससंचित कर दिया। उन्होंने अपने गायन का प्रारंभ राग देश और मध्यलय तीनताल में निबद्ध रचना 'चल कोलिला देखें ब्रज बसंत' सुनाया। उन्होंने ब्रज की पारंपरिक होली 'बन आयो छैला होरी कौ' और 'मृगनयनी कौ यार नवल रसिया' और अंत में 'आज ब्रज में होरी रे रसिया' सुनाकर मंच को रंगीली गली बना दिया। उनके साथ तबला संगत लोकेंद्र तलेगांवकर और संवादिनी पर रविंद्र तलेगांवकर ने संगत की। कार्यक्रम में विशेष आकर्षण अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कैलीग्राफी आर्टिस्ट डॉ. रूपाली खन्ना का मंच पर चित्र निर्माण रहा। डॉ. स्पाली खन्ना ने दोनों कलाकारों की प्रस्तुति को सुनते हुए मंच पर ही कैनवास पर तूलिका से रंग भरे।
इससे पूर्व नई दिल्ली के पं. हरिश्चंदपति और आदि नारायण ने पखावज का वादन किया। उन्होंने बारह मात्रा की चार ताल में परन और तिहाइयों को सुनाया। डॉ. ब्रजबिहारी बिरजू ने होली के पारंपरिक गीतों को सुनाया। पं. गिरधारीलाल शर्मा और छात्रों ने तालवाद्य कचहरी और ध्रुपद गायन प्रस्तुत किया। पं. देवाशीष गांगुली और छात्रों ने वंदेमातरम की भावपूर्ण प्रस्तुति दी और देशभक्ति के गीत गाए। मनोज कुमार, जूली कुमारी, सौरभ ठाकुर, कपिल टंडन ने राष्ट्रगीत माला प्रस्तुत की। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्कार भारती के अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल, समाजसेवी डॉ. हितेश लवानियां, वरिष्ठ अधिवक्ता एड. अरविंद शर्मा, गौरव धवन ने किया।
अतिथियों का स्वागत संस्कार भारती के प्रांतीय उपाध्यक्ष नंदनंदन गर्ग और संचालन महानगर उपाध्यक्ष ओम स्वरूप गर्ग ने किया। कार्यक्रम का समन्वय और आभार मधुकर चतुर्वेदी ने दिया।
कार्यक्रम में छावनी बोर्ड सदस्य राजेश गोयल, मंगल उपाध्याय, गौरव रजावत, संजीव चौबे, छीतरमल गर्ग, श्याम तिवारी, राजीव सिंघल, मीनाक्षी मिश्रा, गीता अग्रवाल, रेनू सत्संगी, कवियत्री मीना शर्मा, गीता अग्रवाल आदि उपस्थित रहीं।
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पुराने रिश्तों में छिपे दर्द, उलझन और जीवन की आपाधापी को उजागर कर गया नाटक "एक टूटी हुई कुर्सी"
आगरा, 26 फरवरी। ताज महोत्सव में गुरूवार को सदर मंच पर हुए नाट्य मंचन के दौरान उस वक़्त थम गया जब नाटक के पात्रों ने दर्शक दीर्घा में बैठे श्रोताओं को उनके पुराने रिश्तों में छिपे दर्द, उलझन और जीवन की आपाधापी को उजागर किया। नाटक था "एक टूटी हुई कुर्सी" नाटक में कलाकारों ने वर्तमान समय की सच्चाई और परेशानियों पर प्रकाश डाला। नाटक के दौरान लगा क्या वाकई “एक टूटी हुई कुर्सी” कुछ कहती है ?
इस नाटक को युवा निर्देशिका मन्नू शर्मा के निर्देशन में नाट्यकर्म थिएटर द्वारा प्रस्तुत किया गया।
यह नाटक इस्माइल चुनारा के मूल अंग्रेजी नाटक “ए ब्रोकन चेयर” का हिंदी में अनुवाद “एक टूटी हुई कुर्सी”, से लिया गया है जिसका हिंदी में रूपातंरण उमा झुनझुनवाला ने किया।
रवि की भूमिका में थे - शैलेश राणा, अज़ीज़ की भूमिका में थे - सार्थक भारद्वाज , सुमित्रा की भूमिका निभायी मन्नू शर्मा ने। नाटक की संगीत संचालन- दीपक निगम, संगीत परिकल्पना- अक्षय प्रताप, प्रकाश परिकल्पना- राम गंगवार , वस्त्र सज्जा- रेखा शर्मा मंच व्यवस्था- राहुल मिलन , सचिन गुप्ता।
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