चैंबर चुनाव: टूट गई गोवर्धन में खाई गई कसम || होली मिलन समारोह प्रचार का माध्यम बने || इंडस्ट्रीज की जानकारी को लेकर चर्चा || किंग मेकर बनने की चाहत || घुसपैठ के प्रयासों को सफलता नहीं

आगरा, 27 फरवरी। नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स यूपी आगरा के वार्षिक चुनावों के लिए प्रचार जोर पकड़ने लगा है। प्रमुख प्रत्याशियों ने मोबाइल फोन पर सभी मतदाताओं से संपर्क शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया का भी सहारा लिया जा रहा है। व्यक्तिगत मुलाकातों के साथ ही व्यापारियों के होली मिलन समारोह भी जनसंपर्क का माध्यम बन गए हैं। 
गौरतलब है कि अध्यक्ष पद के लिए अभी तक दो प्रत्याशी मनोज गुप्ता और मनोज बंसल ने अपना नामांकन पत्र भरा है। उपाध्यक्ष के दो पदों के लिए गिरीश गोयल, अम्बा प्रसाद गर्ग और नीतेश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष पद के लिए लिए विनय अग्रवाल, सतीश गुप्ता और नीरज अग्रवाल ने नामांकन दाखिल किए हैं। इसके अलावा कार्यकारिणी सदस्यों के लिए भी नामांकन भरे जा रहे हैं। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 28 फरवरी है। इसके बाद नौ फरवरी तक नामांकन पत्र वापस लिए जा सकेंगे। आवश्यक होने पर 14 मार्च को अग्रवन में मतदान होगा। देखना होगा कि 28 फरवरी तक प्रमुख पदों पर कोई अन्य प्रत्याशी भी नामांकन पत्र दाखिल करता है या नहीं। कुछ समय पहले तक चर्चा थी कि पिछले साल अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ चुके योगेश जिन्दल या अनिल अग्रवाल भी नामांकन भर सकते हैं, लेकिन उनके नजदीकियों का कहना है कि इस बार उनका चुनाव लड़ने का इरादा नहीं है।
इंडस्ट्रीज की जानकारी को लेकर भी चर्चा
सूत्रों के अनुसार, पिछले दिनों चैंबर कोर कमेटी की बैठक के बाद पूर्व अध्यक्षों के अनौपचारिक विमर्श में इस बार सक्षम प्रत्याशी को आगे बढ़ाने की बात कही गई। विमर्श के बाद कुछेक पूर्व अध्यक्षों ने कह दिया कि पिछले साल यह बात क्यों नहीं उठाई गई। उन्होंने सक्षम की परिभाषा पर भी सवाल खड़े कर दिए। कुछ सदस्यों का जोर है कि अध्यक्ष इंडस्ट्रीज का जानकार होना चाहिए। तो ट्रेडर्स के प्रति झुकाव रखने वाले इसके लिए शास्त्रार्थ कराने को तैयार नजर आ रहे हैं।
किंग मेकर बनने की चाहत भी
चुनाव प्रचार शुरू होते ही कुछ पूर्व अध्यक्षों में किंग मेकर बनने की भी इच्छा बलवती हो गई है। पिछले चुनावों में स्वयं को किंग मेकर बताने वाले कुछेक पूर्व अध्यक्षों ने अपने तरीके से गोटियां बैठानी शुरू कर दी हैं। इसके लिए लगभग रोज ही बैठकों के दौर शुरू हो चुके हैं। कुछ लोग बंद कमरे में योजनाएं बना रहे हैं तो कुछ लोग मॉर्निंग वॉक के दौरान भविष्य का खाका खींच रहे हैं। क्रिकेट मैच के दौरान भी मिलजुल कर बात करने के प्रयास किए गए। मतदाताओं को अपने पाले में खींचने की हरसंभव रणनीति बनाई जा रही है। 
टूट गई गोवर्धन में खाई गई कसम!
इस बीच पता चला है कि चुनाव मैदान में मौजूद कुछ प्रत्याशियों के बीच पिछले साल ही एक साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर सहमति बन गई थी। पिछले वर्ष गोवर्धन में हुए एक धार्मिक आयोजन के दौरान इस बारे में कसमें भी खाई गई थीं। लेकिन चुनावी जंग में ये कसमें टूट गई। कुछ माह तक साथ नजर आये प्रत्याशी अब आमने-सामने के खेमे में बंट चुके हैं। इसके बावजूद किसी प्रत्याशी का हौसला कमजोर नहीं पड़ा है क्योंकि सभी को अपने-अपने वोट बैंक पर भरोसा है।
घुसपैठ के प्रयासों को सफलता नहीं
अभी तक के परिदृश्य में एक पैनल में अभी उपाध्यक्ष पद पर एक ही प्रत्याशी है तो दूसरे पैनल में दो प्रत्याशी हैं। ऐसे में एक प्रत्याशी ने दोनों पैनलों में घुसपैठ करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। फिलहाल इस प्रत्याशी को कोई आश्वासन नहीं मिला है। इसी प्रकार दूसरे पैनल में कोषाध्यक्ष के लिए दो प्रत्याशी हैं। इनमें से कौन मैदान में रहेगा और कौन हटेगा या दोनों मैदान में रहकर अपना दमखम दिखाएंगे यह भी तय होना बाकी है। फिलहाल दोनों ही प्रत्याशी अपनी-अपनी मजबूती का दावा कर रहे हैं। उनके समर्थक भी दबाव की राजनीति कर रहे हैं।
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