‘पिंच ऑफ स्पाइस’ पर उपभोक्ता अदालत ने लगाया 55 हजार रुपये का जुर्माना, जबरन सर्विस चार्ज वसूलना पड़ा भारी

आगरा, 30 जनवरी। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम ने ग्राहकों से जबरन सर्विस चार्ज वसूलने और अभद्र व्यवहार करने के मामले में संजय प्लेस स्थित प्रसिद्ध रेस्टोरेंट ‘पिंच ऑफ स्पाइस’ के खिलाफ कड़ा फैसला सुनाया है।
आयोग ने रेस्टोरेंट को आदेश दिया कि वह परिवादी को मानसिक पीड़ा और वाद-व्यय के मद में कुल 55 हजार रुपये का भुगतान करे।
खबरों के मुताबिक, कमलानगर निवासी आशीष गर्ग ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि 23 जून 2025 को वह अपने परिवार के साथ उक्त रेस्टोरेंट में डिनर करने गए थे। वहां न केवल खाने की क्वालिटी खराब थी, बल्कि बिल में नियमों के विरुद्ध 05 प्रतिशत सर्विस चार्ज भी जोड़ दिया गया था। जब परिवादी ने इसका विरोध किया और सरकार के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया, तो रेस्टोरेंट स्टाफ और मैनेजर ने उनके साथ गाली-गलौज और अभद्रता की।
मामले की सुनवाई के दौरान रेस्टोरेंट की ओर से कोई भी पक्ष रखने नहीं आया, जिसके बाद आयोग ने एकपक्षीय कार्यवाही की। आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने पाया कि अनिवार्य सर्विस चार्ज वसूलना एक अनुचित व्यापार प्रथा (Unfair Trade Practice) है। दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, सर्विस चार्ज पूरी तरह स्वैच्छिक होना चाहिए और इसे बिल में स्वतः नहीं जोड़ा जा सकता। रेस्टोरेंट द्वारा दी गई सेवा में स्पष्ट रूप से कमी पाई गई।
आयोग ने रेस्टोरेंट ‘पिंच ऑफ स्पाइस’ को 50 हजार रुपये मानसिक पीड़ा की क्षतिपूर्ति के रूप में। पांच हजार रुपये वाद-व्यय (कानूनी खर्च) के रूप में देने का आदेश दिया। यह राशि परिवाद दाखिल करने की तिथि (22.07.2025) से 06 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 45 दिनों के भीतर अदा करनी होगी। यदि रेस्टोरेंट समय पर भुगतान करने में विफल रहता है, तो ब्याज की दर बढ़ाकर 09 प्रतिशत कर दी जाएगी।
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