नगर निगम सदन की बैठक में गरमाया सड़क निर्माण में गड़बड़ी का मामला, महापौर ने दिए उच्च स्तरीय जांच के निर्देश, हंगामे के बीच पास किया गया पुनरीक्षित बजट
आगरा, 29 नवम्बर। नगर निगम में शनिवार को हुई सदन की बैठक के दौरान पार्षदों ने सड़क निर्माण में हुए कथित घोटाले को लेकर खूब हंगामा किया। पार्षदों नें पूरे प्रकरण की जांच करने की मांग की। उन्होंने जांच न होने की स्थिति में नगर निगम प्रांगण में धरना देने की भी बात कही।
दरअसल, बीते दिनों नगर निगम आगरा द्वारा 15 वें वित्त आयोग के फंड से हेमा पेट्रोल पंप से पश्चिमपुरी चौराहे तक सड़क चौड़ीकरण व डामरीकरण एवं इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछाने के कार्य में हुई गड़बड़ी की खबर मीडिया में प्रकाशित हुई थी। इस खबर को लेकर पार्षद रवि व पार्षद प्रवीना राजावत ने शनिवार को हुई सदन की बैठक में हंगामा किया। पार्षदों ने कहा कि इस सड़क पर कागजों में वर्ष 2023-24 में कार्य हुआ दिखाया गया है, जबकि चार माह पूर्व ही सड़क के किनारों पर इंटलॉकिंग के कार्य का उद्घाटन हुआ है। एक ही कार्य को दो-दो बार क्यों किया गया है। पार्षदों ने इस कार्य की जांच कराने की मांग की।
सदन की अध्यक्षता कर रहीं महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह ने पार्षदों को शांत कराते हुए नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाकर सात दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। तब जाकर मामला कुछ शांत हुआ।
जलकल की गलती का खामियाजा क्यों भुगते आम जनता?
इसके बाद पार्षदों के एक दल ने जलकल विभाग द्वारा पानी के बिलों को अचानक बढ़ाए जाने पर हंगामा कर दिया। पार्षदों ने कहा कि जिन उपभोक्ताओं ने अपना बिल भर दिया है, जलकल द्वारा उनका बिल अचानक से बढ़ा दिया गया है। यह पूरी तरह से गलत है। दरअसल, नगर निगम द्वारा वर्ष 2014 में वार्षिक मूल्यांकन किया था, जिसके आधार पर पानी के बिलों की दरों को अद्यतन किया जाना था, लेकिन जलकल विभाग ने 2014 में नगर निगम द्वारा बढ़ाए गए वार्षिक मूल्यांकन को नहीं लिया। इसे 2024 में लागू करके उपभोक्ताओं के पानी के बिल का बकाया बढ़ा दिया गया। पार्षदों ने कहा कि जो लोग समय से बिल भरते थे, जिनका बकाया शून्य था, जलकल विभाग की इस हरकत की वजह से उन लोगों का पानी के बिल का बकाया लाखों रूपये हो गया है। जलकल विभाग की गलती का खामियाजा आम जनता क्यों भुगते? पार्षदों ने वार्षिक मूल्यांकन की दरों को अप्रैल 2026 से लागू करने की मांग की।
पास हुआ पुनरीक्षित बजट
वर्ष 2025-26 के मूल बजट में 1597.81 करोड़ रुपये नगर निगम आगरा की आय का अनुमान था, जिसको पुनरीक्षित करके 1590.45 करोड़ कर दिया गया। वहीं, मूल बजट में 1320.77 करोड़ व्यय का अनुमान था, जिसे पुनरीक्षित करके 1427.27 करोड़ रुपये कर दिया गया। यदि प्रारंभिक बजट में के अवशेष 416.75 करोड़ रुपये और पुनरीक्षित आय को जोड़ दें तो वर्ष 2025-26 में नगर निगम आगरा का बजट 2007.21 करोड़ रुपये हो जाएगा, इसमें से 1427.27 करोड़ रुपये व्यय होने के बाद 579.94 करोड़ रुपये बचत होगी।
सदन में जलकल विभाग के बजट को भी रखा गया। वर्ष 2025-26 के मूल बजट में जलकल विभाग की आय का अनुमान 152.23 करोड़ रुपये रखा गया था, जिसे पुनरीक्षित करके 152.55 करोड़ रुपये कर दिया गया। आय के सापेक्ष 137.85 करोड़ रुपये का व्यय का अनुमान था, जिसे पुनरीक्षित करके 138.85 करोड़ रुपये कर दिया गया।
इन मुद्दों पर भी हुई चर्चा
- सदन में पार्षदों ने कहा की पुनरीक्षित बजट पूर्ण सूचना नहीं दे रहा है। संपूर्ण बिल इस बजट में नहीं लग पाए हैं। इससे स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। इससे भविष्य में परेशानी आ सकती है।
- एकमुश्त योजना के अंतर्गित पानी के बिल की ब्याज पर छूट का प्रस्ताव पास किया गया, जो एक जनवरी 2026 से लागू हो जाएगा।
- कुत्तों और बंदरों के बंध्याकरण के बजट को लेकर पार्षद रवि बिहारी माथुर ने मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बजट बढ़ाने के बावजूद इनकी संख्या बढ़ रही है। पार्षद ने तंज कसते हुए कहा कि कहीं उनकी संख्या बढ़ाने का इंजेक्शन तो नहीं लगाया जा रहा है। इस पर अधिकारियों की ओर से जवाब दिया गया कि जल्द ही कुत्तों और बंदरों के लिए शेल्टर बनाए जाने का प्रस्ताव बनाया जाएगा।
- इसके अतिरिक्त पार्किंग, होर्डिंग, हाउस टैक्स जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
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