दशहरा शोभायात्रा समिति के गठन पर विवाद, फर्जी समिति बनाने का आरोप, डीसीपी से कार्रवाई की मांग

आगरा, 15 अक्टूबर। विजयादशमी पर लोहामंडी से सेंटजोंस चौराहे तक निकाली जाने वाली दशहरा शोभायात्रा की आयोजन समिति के गठन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पार्षदगण और क्षेत्रीय निवासियों ने पुलिस उपायुक्त को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि विगत चारअक्टूबर को सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय को दरकिनार कर कुछ लोगों ने निजी और राजनीतिक स्वार्थ के लिए फर्जी समिति का गठन कर लिया है।
शिकायत के अनुसार विगत 11 सितंबर को पार्षद शरद चौहान के निवास पर बैठक हुई थी। इसमें रामदास कटारा, पार्षद हेमंत प्रजापति, विक्रांत कुशवाह, विनय अग्रवाल, हिमांशु शिवहरे, विकास गुप्ता, अमित बंसल, अमित सिंह पटेल सहित कई क्षेत्रीय लोग मौजूद थे। बैठक में तय हुआ कि समिति रजिस्टर्ड नहीं है, इसलिए हर साल चुनाव अधिकारियों और वरिष्ठ संरक्षक मंडल की मौजूदगी में समिति बनाई जाती है। पिछले साल के आय-व्यय का लेखा-जोखा रखने और नई समिति के चुनाव के लिए चार अक्टूबर को मंदिर प्रांगण में बैठक करना तय हुआ। चार अक्टूबर की बैठक में चुनाव अधिकारी बसंत श्रीवास्तव, रामदास कटारा और मटरू सिंह मौजूद थे। सदस्यों ने पिछले वर्ष का आय-व्यय का ब्योरा मांगा, लेकिन ब्योरा नहीं दिया गया। इस पर विवाद हो गया।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि विवाद के बाद चुनाव अधिकारियों ने मौजूद सभी सदस्यों का मत लेकर सर्वसम्मति से तय किया कि इस साल किसी भी व्यक्ति को अध्यक्ष या पदाधिकारी नहीं बनाया जाएगा। बल्कि सभी कार्यकर्ताओं की देखरेख में दशहरा शोभायात्रा निकाली जाएगी। पहले भी विवाद होने पर इसी तरह आयोजन सफलतापूर्वक हुआ है।
फर्जी समिति गठन का आरोप -
आरोप है कि 13 अक्टूबर तक मंदिर प्रांगण में रोज बैठकें चल रही थीं और इसकी सूचना व्हाट्सएप ग्रुप पर दी जा रही थी। लेकिन 14 अक्टूबर को समाचार पत्रों और सोशल मीडिया से पता चला कि विनय अग्रवाल ने खुद को स्वयंभू अध्यक्ष बताकर नई समिति का गठन कर लिया है।
शिकायत में कहा गया है कि विनय अग्रवाल समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ चुके हैं और राजनीतिक उद्देश्य के लिए षड्यंत्र रच रहे हैं। उनके इस कदम से क्षेत्रीय लोगों और रामभक्तों में आक्रोश है। चुनाव अधिकारियों ने भी व्हाट्सएप ग्रुप पर आपत्ति दर्ज की है।
पार्षदों ने डीसीपी से मांग की है कि बैठक रजिस्टर और पिछले आयोजनों के लेखा-जोखा की जांच कर चार अक्टूबर के सर्वसम्मत निर्णय को बहाल किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि शोभायात्रा मिश्रित आबादी से होकर निकलती है और हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं, ऐसे में विवाद से शांति व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
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