लक्ष्मण के प्रहार से धराशायी हुआ मेघनाद, आतिशबाजी के साथ 90 फुट ऊंचे पुतले का दहन

आगरा, 19 अक्टूबर। रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित रामलीला में सोमवार को मेघनाद वध की लीला का भव्य और रोमांचक मंचन किया गया। मेघनाद वध के बाद लगभग 90 फुट ऊंचे विशाल पुतले का आतिशी धमाकों के बीच दहन किया गया। पुतले में लगी आतिशबाजी एक के बाद एक फूटती रही और कुछ ही देर में विशाल पुतला जलकर राख हो गया।
आगरा किले के सामने स्थित ऐतिहासिक रामलीला मैदान में लीला का आरंभ दशानन के दरबार से हुआ, जहां कुंभकर्ण के वध का समाचार पहुंचते ही रावण शोक में डूब गया। क्रोधित रावण ने अपने मायावी और पराक्रमी पुत्र मेघनाद को युद्धभूमि में जाने का आदेश दिया। पिता की आज्ञा पाकर मेघनाद गर्जना करता हुआ युद्ध के लिए निकल पड़ा। रामदल और रावण दल के सैनिक आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते महासंग्राम छिड़ गया। युद्ध में मेघनाद ने मायावी शक्तियों का प्रयोग किया, लेकिन अंततः भगवान श्रीराम का स्मरण कर लक्ष्मण जी ने उस पर निर्णायक प्रहार किया। प्रहार लगते ही मेघनाद का शरीर धराशायी हो गया और उसका शीश कटकर रामदल के सामने जा गिरा। 
मेघनाद का शीश गिरने के बाद उसकी पतिव्रता पत्नी सुलोचना श्रीराम के पास पहुंची और पति का शीश मांग कर विलाप करने लगी। राम ने उसे मेघनाद का शीश देकर विदा किया।
पुतला दहन से पूर्व आकर्षक आतिशबाजी का आयोजन हुआ। गुलाब के फूल, कमल के फूल, आकाशी झरनों और भगवान श्रीराम के युद्ध दृश्यों को आतिशबाजी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। राम राहुल शर्मा ने बताया कि लीला के दौरान लक्ष्मण जी को सर्पों के विभिन्न स्वरूपों से युक्त मुकुट धारण कराया गया।
इस अवसर श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल और महामंत्री राजीव अग्रवाल समेत अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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