गड्ढों से मौत पर मुआवजा और जिम्मेदारी तय हो, सुप्रीम कोर्ट में 25 नवंबर को सुनवाई - दो साल में गड्ढों ने ली 4546 जान

आगरा, 18 अक्टूबर। सड़क के गड्ढों से होने वाली मौतों पर मुआवजा और जिम्मेदारी तय करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 25 नवंबर को सुनवाई करेगा। अधिवक्ता एवं सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता के.सी. जैन ने एक विज्ञप्ति में 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में अपने आवेदन का उल्लेख किया, जिस पर जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने 25 नवंबर दोपहर 2 बजे सुनवाई तय की है।
विज्ञप्ति के अनुसार, जैन ने कोर्ट के सामने नया प्रस्ताव रखा है - पहले पानी की निकासी सुनिश्चित हो, फिर सड़क बने। साथ ही हर सड़क की उम्र, गारंटी, खर्च और ठेकेदार का पूरा हिसाब गूगल मैप पर एक टच में जनता को मिले।
दो साल में 4546 मौतें
सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में गड्ढों से 5,840 हादसे, 2,161 मौतें और 2024 में 5,432 हादसे, 2,385 मौतें हुईं। दो साल में कुल 11,272 हादसे, 4,546 मौतें और 9,952 लोग घायल हुए। यानी हादसे घटे पर मौतें 224 बढ़ गईं। 2018-22 तक 8,963 मौतें दर्ज हैं।
यूपी में 65 हजार किमी सड़कें खराब
प्रदेश में बारिश के बाद 65,093 किमी सड़कें खराब पाईं गईं, जिनमें से 12,228 किमी पर ही गड्ढे भरे गए। लोक निर्माण की 47,019 किमी खराब सड़कों में 9,941 किमी पर काम हुआ। हर साल गड्ढे भरने पर ही ₹250-300 करोड़ खर्च होते हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव पर 2023-24 में ₹6,523 करोड़ और 2024-25 में ₹9,488 करोड़ खर्च हुए।
क्या है मांग?
याचिका में मांग है कि जांच में हादसे की वजह गड्ढा, खुला मैनहोल या नाली पाए जाने पर जिम्मेदार विभाग 6 माह में खुद मुआवजा दे - मृत्यु पर ₹5 लाख, स्थायी दिव्यांगता पर ₹50 हजार से ₹5 लाख, गंभीर चोट पर ₹50 हजार और मामूली चोट पर ₹25 हजार। यह व्यवस्था 20 जुलाई 2018 के बाद के हादसों पर लागू हो।
पहले निकासी का सर्टिफिकेट, फिर सड़क
जैन का मुख्य सुझाव है कि टेंडर से पहले इंजीनियर लिखकर बताए कि पानी कहां जाएगा। सड़क की ढाल, नाली, पुलिया और अंतिम निकास का जिक्र हो। निकासी चालू होने से पहले डामर की अंतिम परत न बिछे। नालियों की नियमित सफाई, फोटो, तारीख और खर्च का रिकॉर्ड रखा जाए।
हर सड़क को यूनिक ID देकर गूगल मैप से जोड़े जाने का प्रस्ताव है, जिस पर टच करते ही - लंबाई, स्वीकृत राशि, ठेका राशि, वास्तविक खर्च, ठेकेदार-अभियंता का नाम, शुरू-पूरा होने की तारीख, सड़क की उम्र, गारंटी, ड्रेनेज सर्टिफिकेट सब दिखे।
शिकायत के लिए वेबसाइट, टोल-फ्री, व्हाट्सएप और मैप पर फोटो के साथ शिकायत की सुविधा हो, 15 दिन में कार्रवाई न होने पर मामला राज्य के नोडल विभाग तक जाए।
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