पॉलिसी में गुमराह करना पड़ा भारी, मैक्स लाइफ इंश्योरेंस और एक्सिस बैंक को दो लाख रुपये लौटाने के आदेश
आगरा, 17 सितम्बर। फ्री लुक पीरियड में पॉलिसी रद्द करने के बाद भी प्रीमियम न लौटाना बीमा कंपनी को महंगा पड़ा। जिला उपभोक्ता आयोग-प्रथम ने इसे सेवा में कमी मानते हुए मैक्स लाइफ इंश्योरेंस और एक्सिस बैंक को 2,04,500 रुपये ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है।
आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने 20 हजार मानसिक क्षतिपूर्ति और पांच हजार वाद व्यय भी देने को कहा है। समय पर भुगतान न करने पर नौ फीसद ब्याज लगेगा।
मामला शाहगंज निवासी डॉ. ध्रुव दत्त पाठक और उनके दो नाबालिग बेटों का है। उन्होंने बच्चों की शिक्षा के लिए एक्सिस बैंक शाखा से मैक्स लाइफ की दो पॉलिसी लीं। प्रत्येक का प्रीमियम 51,125 रुपये था, कुल 1,02,250 रुपये जमा किए।
आरोप था कि बैंक कर्मियों ने 15 साल बाद 2032 में परिपक्वता का आश्वासन दिया, लेकिन दस्तावेज में भुगतान 2091 तक और पहला भुगतान 2077 में दिखा, जब बच्चों की उम्र 61 साल होगी।
असंतुष्ट होकर परिवादी ने 12 नवंबर 2018 को फ्री लुक पीरियड में रद्द करने की अर्जी दी। बैंक ने संशोधन का आश्वासन दिया, लेकिन अक्टूबर 2019 में दूसरी किस्त के 1,02,250 रुपये भी ईसीएस से काट लिए। कुल 2,04,500 रुपये नहीं लौटाए तो परिवादी ने आयोग में परिवाद किया।
कंपनी ने कहा कि अवधि बीतने के बाद रद्द करने की मांग आई, इसलिए राशि जब्त की। बैंक ने खुद को चैनल पार्टनर बताया।
आयोग ने कैलेंडर जांचा तो पाया कि 26 अक्टूबर 2018 को दस्तावेज मिले। बीच में दीपावली, गोवर्धन, भैया दूज और शनिवार-रविवार की छुट्टियां थीं। पंद्रह दिन की अवधि 15 नवंबर को खत्म हो रही थी, जबकि अर्जी 12 नवंबर को ही दी गई थी।
आयोग ने इसे अनुचित व्यापारिक आचरण माना और 15 दिन में पूरी राशि 12 नवंबर 2019 से भुगतान तक छह प्रतिशत ब्याज के साथ जमा करने का आदेश दिया।
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