आगरा में सपा कार्यालय के थप्पड़ कांड ने लिया नया मोड़, पीड़ित नेता का ही पार्टी से निष्कासन, जातिगत भेदभाव का आरोप

आगरा, 13 सितम्बर। समाजवादी पार्टी कार्यालय में हुए थप्पड़ कांड ने अब नया मोड़ ले लिया है। पार्टी के पूर्व पदाधिकारी राघवेंद्र सिंह ने सपा के अंदर जातिगत भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राघवेंद्र ठाकुर का आरोप है कि सपा के मथुरा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव ने उन्हें गालियां दीं और थप्पड़ मारे। शिकायत करने पर कार्रवाई जिलाध्यक्ष पर होने के बजाय उन्हें और भारतभूषण शर्मा को ही पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
राघवेंद्र के मुताबिक, घटना के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें लखनऊ बुलाकर जिलाध्यक्ष पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में उल्टा उन्हीं पर कार्रवाई कर दी गई, जिससे वह बेहद आहत हैं।
मामला विगत आठ जुलाई का है। आगरा के फतेहाबाद रोड स्थित सपा कार्यालय में ब्राह्मण सम्मेलन की तैयारियों को लेकर बैठक बुलाई गई थी, जिसमें आगरा-मथुरा के कई पदाधिकारी और सांसद सनातन पांडेय मौजूद थे। इसी दौरान मथुरा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव का भारतभूषण शर्मा और राघवेंद्र ठाकुर से विवाद हो गया। आरोप है कि वीरेंद्र यादव ने राघवेंद्र को थप्पड़ मारे। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। घटना के बाद तबीयत बिगड़ने पर राघवेंद्र को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था, जहां सांसद सनातन पांडेय उनसे मिलने पहुंचे थे।
   
राघवेंद्र के मुताबिक वह 2008 से सपा से जुड़े हैं और कई आंदोलनों में जेल जा चुके हैं। वृंदावन में कुंभ मेले का उद्घाटन सीएम योगी से पहले फीता काटने और सीएम का पुतला फूंकने पर भी वह जेल गए थे। वर्ष 2019 से 2022 तक छात्रसभा के जिलाध्यक्ष और 2022 से 2024 तक यूथ ब्रिगेड के जिलाध्यक्ष रहे। भारतभूषण शर्मा यूथ ब्रिगेड में प्रदेश सचिव थे।
राघवेंद्र ने सवाल उठाया कि विवाद के दौरान मुन्ना मलिक और लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष पवन चौधरी भी मौके पर मौजूद थे, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। केवल उन्हें और भारतभूषण को निष्कासित करना जातिगत भेदभाव नहीं तो क्या है? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अखिलेश यादव से आश्वासन मिलने के बाद भी कार्रवाई पीड़ितों पर ही क्यों हुई?
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