क्लेम खारिज करना पड़ा महंगा, उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी पर लगाया 1.42 लाख का जुर्माना

आगरा, 02 सितम्बर। स्वास्थ्य बीमा का क्लेम खारिज करना मणिपाल सिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम ने कंपनी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए इलाज की राशि ब्याज समेत लौटाने का आदेश दिया है।
परिवाद संख्या 185/2025 सदर बाजार के सैनिक नगर निवासी आलोक कुमार माथुर ने अधिवक्ता दुर्गेश शर्मा के माध्यम से दायर किया था। परिवादी ने 10 अक्टूबर 2024 को 25,467 रुपये प्रीमियम देकर 5 लाख रुपये की कैशलेस हेल्थ पॉलिसी (SARVAH050006694) ली थी, जिसकी वैधता 23 अक्टूबर 2025 तक थी।
30 नवंबर, 2024 को पत्नी ज्योति माथुर की तबीयत बिगड़ने पर 12 दिसंबर को रामतेज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। कंपनी को कैशलेस के लिए सूचित किया गया तो इलाज के बाद क्लेम देने का आश्वासन दिया। डिस्चार्ज पर 88,506 रुपये और बाद में दवा-जांच में 25 हजार खर्च हुए।
कंपनी ने 29 मार्च, 2025 को देरी से क्लेम का हवाला देकर क्लेम खारिज कर दिया। नोटिस के बाद भी कंपनी पक्ष रखने नहीं आई, तो आयोग ने एकपक्षीय कार्यवाही की।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने 11 जून 2026 को आदेश दिया कि कंपनी 45 दिन में 1,12,026 रुपये 25 सितंबर 2025 से 6% ब्याज सहित, 20 हजार मानसिक क्षतिपूर्ति और 10 हजार वाद व्यय जमा करे। चूक पर 9% ब्याज देना होगा।
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