सीआईडी द्वारा तीन मुकदमे दर्ज कराने से फिर चर्चा में आया बोदला-खतैना रोड का जमीन विवाद

आगरा, 30 अगस्त। बोदला-खतैना रोड स्थित करीब दस हजार वर्गगज की जमीन को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जमीन के मालिकाना हक की लड़ाई के बीच दस्तावेजों में एक व्यक्ति के मृत्यु प्रमाणपत्र से लेकर कथित वारिसान, नामांतरण, मुख्तारनामा और करोड़ों रुपये के जमीन सौदों तक गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया गया है कि सीआईडी जांच में सरकारी रिकॉर्ड और जमीन से जुड़े दस्तावेजों में कई विरोधाभास सामने आए। जांच अधिकारी रहे सीआईडी निरीक्षक अनिल प्रताप सिंह की तहरीर पर जगदीशपुरा थाने में विगत चार जुलाई को तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए। इन मुकदमों में अलग-अलग लोगों पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, संदिग्ध तरीके से जमीन पर अधिकार जताने और एक ही जमीन से जुड़े कई सौदे करने के आरोप लगाए गए हैं।
पूरे मामले की जांच में सबसे चौंकाने वाला पहलू जसवीर सिंह के नाम से जुड़ा मृत्यु प्रमाणपत्र है। पहले मुकदमे में नगर निगम के सफाई नायक अजय कुमार और तत्कालीन सफाई खाद्य निरीक्षक परमानंद को आरोपी बनाया गया है। जांच में सामने आया कि जसवीर सिंह की मृत्यु 29 अक्टूबर, 2021 को होने की जानकारी के आधार पर उनका मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किया गया था। बाद में मामले में सवाल उठने के बाद नगर निगम ने सात जून, 2024 को मृत्यु प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया। सीआईडी जांच में दोनों कर्मचारियों की भूमिका को आपत्तिजनक मानते हुए कार्रवाई की संस्तुति की गई। इस मृत्यु प्रमाणपत्र का जमीन विवाद से जुड़े दस्तावेजों और मालिकाना हक के दावों से संबंध सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
जांच में जमीन के मूल मालिकाना हक और उससे जुड़े पुराने रिकॉर्ड की भी पड़ताल की गई। इस दौरान मृत्यु प्रमाणपत्र और कथित वारिसान से जुड़े दस्तावेजों के अलावा नामांतरण की प्रक्रिया भी जांच के घेरे में आ गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार, जसवीर सिंह के नाम जमीन का नामांतरण होने के बाद कुछ लोगों ने जमीन पर अधिकार जताने की कोशिश की।
दूसरे मुकदमे में किशन मुरारी, रवि कुशवाह, राजू और बंटू से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है। आरोप है कि राजू और बंटू को गवाह बनाकर 27 जनवरी, 2020 को उप निबंधक सदर पंचम कार्यालय में मुख्तारनामा पंजीकृत कराया गया। जांच रिपोर्ट में यह आरोप लगाया गया कि दस्तावेज तैयार कराने वाले लोगों को इस बात की जानकारी थी कि जसवीर सिंह जमीन के वास्तविक मालिक नहीं थे। इसके बावजूद जमीन पर अधिकार और कब्जा स्थापित करने की नीयत से दस्तावेज तैयार कराए गए।
तीसरे मुकदमे में पंजाब के लुधियाना जिले के निवासी टहल सिंह को आरोपी बनाया गया है। जांच में 31 मार्च, 1980 के डीड ऑफ डिसॉल्यूशन का उल्लेख किया गया है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इस दस्तावेज के आधार पर जमीन का नामांतरण पदम कुमार जैन समेत अन्य लोगों के नाम किया गया था। इसके बावजूद आरोप है कि बाद के वर्षों में उसी जमीन को लेकर अलग-अलग लोगों के साथ इकरारनामे, पावर ऑफ अटॉर्नी और बैनामे किए गए। जांच में वर्ष 2007 में करीब 10 लाख रुपये में जमीन का सौदा किए जाने का उल्लेख है। वहीं, वर्ष 2016 में करीब 7.49 करोड़ रुपये की कीमत दर्शाते हुए बैनामा किए जाने की बात भी सामने आई है। यही नहीं, जमीन के मालिकाना हक को लेकर पहले से मौजूद विवाद के बावजूद अलग-अलग समय पर हुए दस्तावेजों और सौदों ने जांच को और जटिल बना दिया है।
बोदला-खतैना रोड जमीन प्रकरण कोई नया मामला नहीं है। इस विवाद में पहले भी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ चुके हैं। पूर्व में हुई जांच के दौरान तत्कालीन जगदीशपुरा थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में आई थी। एसआईटी ने उन्हें आपराधिक साजिश के मामले में आरोपी बनाया था। जांच के दौरान बिल्डर कमल चौधरी, उसके बेटे आर्यन उर्फ धीरू, पुरुषोत्तम पहलवान, भूपेंद्र पहलवान, किशोर बघेल, अमित अग्रवाल, आनंद जुरैल और नेम कुमार जैन समेत कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आए थे। मामले में करीब दो हजार पन्नों की चार्जशीट तैयार होने और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ने की जानकारी भी सामने आई थी। बाद में शासन के निर्देश पर जुलाई, 2024 में मामले की जांच सीबीसीआईडी के आगरा सेक्टर को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई।
अब चार जुलाई, 2026 को दर्ज हुए तीन मुकदमों के बाद बोदला-खतैना रोड की यह जमीन एक बार फिर चर्चा में आ गई है। एक ओर मृत्यु प्रमाणपत्र और कथित वारिसान से जुड़े दस्तावेज सवालों के घेरे में हैं, तो दूसरी ओर नामांतरण, मुख्तारनामा और एक ही जमीन के कई लोगों के साथ किए गए कथित सौदों की जांच चल रही है।
मामले का सबसे अहम सवाल यही है कि जिस जमीन के मालिकाना हक को लेकर वर्षों से विवाद चल रहा था, उससे जुड़े दस्तावेज आखिर किन परिस्थितियों में तैयार हुए और उनका इस्तेमाल किन लोगों ने किया? सीआईडी जांच के आधार पर दर्ज मुकदमों में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी। पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां मामले से जुड़े दस्तावेजों, रिकॉर्ड और आरोपों की पड़ताल कर रही हैं।
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