"शिक्षक से गुरु बनने की जरूरत, गुरु ही दिशा देकर बदलता है जीवन की दशा" || 385 शिक्षकों का सम्मान, छह पुस्तकों का लोकार्पण

आगरा, 09 अगस्त। शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के व्यक्तित्व, संस्कार और चरित्र का निर्माता होता है। शिक्षक से आगे बढ़कर गुरु बनने की आवश्यकता है, क्योंकि गुरु वह होता है जो अपने शिष्य को सही दिशा देकर उसके जीवन की दशा बदल देता है। यह विचार जेपी सभागार, खंदारी परिसर में आयोजित राष्ट्रीय शैक्षिक कार्यशाला, पुस्तक लोकार्पण, शिक्षक सम्मान एवं ‘शिक्षा और संस्कार’ विषय पर संगोष्ठी में वक्ताओं ने व्यक्त किए।
मुख्य अतिथि प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने ‘शिक्षा और संस्कार’ विषय पर कहा कि वर्तमान समय में प्रत्येक शिक्षक को आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है कि वह केवल विद्यार्थियों को पढ़ा रहा है या उनके जीवन का मार्गदर्शन भी कर रहा है। गुरु वह है, जो दिशा देकर जीवन की दशा बदल देता है।
आयुष राज्यमंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने कहा कि आने वाला कल भारत का है और शिक्षक इस नए भारत की नीति भी हैं और आवश्यकता भी। नई पीढ़ी को भारत की गौरवशाली ज्ञान परंपरा से परिचित कराने की जिम्मेदारी शिक्षकों की है।
पद्मश्री डॉ. आर.एस. पारिख ने यजुर्वेद के महत्वपूर्ण सूत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति वरणीय और गौरवशाली है, उस पर गौरवान्वित होना सीखें। पद्मश्री डॉ. उषा यादव ने कहा कि आधुनिकता के दौर में अपनी संस्कृति और संस्कारों को बचाए रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है और इसमें शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद प्रो. ओमपाल सिंह ‘निडर’ ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा, “देश के जवानों जागो, भारतीय पुकारती है। अब राजनीति को भी नया रूप दीजिए।” 
डायट प्रवक्ता डॉ. मनोज वार्ष्णेय ने प्रदेश सरकार द्वारा संचालित ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से प्राथमिक विद्यालयों में हुए सुधारों की जानकारी दी। 
कार्यक्रम में शिक्षकों एवं शिक्षा से जुड़े विषयों पर लिखी गई छह पुस्तकों का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया।
लोकार्पित पुस्तकों में डॉ. राजेश शर्मा एवं डॉ. पुष्पेंद्र सिंह की ‘स्मार्ट टीचर स्मार्ट स्कूल’, डॉ. अशोक कुमार एवं डॉ. सतीश कुमार की ‘मेरा विद्यालय मेरी पहचान’, डॉ. रश्मि सिंघल एवं डॉ. प्रेमलता शर्मा की ‘हमारा विद्यालय हमारी पहचान’, डॉ. बहोरन सिंह एवं डॉ. सत्यपाल सिंह की ‘पर्यावरण संरक्षण में शिक्षकों की भूमिका’, मुकेश शर्मा एवं ज्योति जैन की ‘इको क्लब में शिक्षकों की भूमिका’ तथा डॉ. राजेश शर्मा की ‘शिक्षा और संस्कृति’ शामिल हैं।
385 शिक्षकों को किया सम्मानित
कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए 385 शिक्षकों को उनके शैक्षिक योगदान एवं उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर शिक्षकों के सम्मान को ज्ञान, संस्कार और राष्ट्र निर्माण की परंपरा का सम्मान बताया गया।
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