शहर में बनाए जाएं वाइन जोन, दलित बस्तियों और घनी आबादी से शराब की दुकानें हटाने की मांग पर मानवाधिकार आयोग ने मांगा जवाब
आगरा, 20 जून। मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता नरेश पारस ने दलित बस्तियों और अन्य घनी आबादी वाले इलाकों से शराब की दुकानें हटाने की मांग राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से की है।
उन्होंने इन दुकानों से जुड़ी उत्पीड़न, हिंसा और दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाओं की ओर ध्यान दिलाया है। संवैधानिक और कानूनी उल्लंघनों का हवाला देते हुए, उसने इन्हें नियंत्रित वाइन जोन में स्थानांतरित करने का आग्रह किया है। पारस के अनुसार, इस पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए शिकायत की एक प्रति ऑनलाइन माध्यम से जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को भेजी गई है। कार्रवाई की रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर आयोग को भेजनी होगी।
मानवाधिकार आयोग को भेजे पत्र में नरेश पारस ने कहा कि शहर की दलित, मलिन एवं घनी आबादी वाली बस्तियों में हाल ही में शराब के ठेके खोले गए हैं। इन ठेकों के बाहर दिन-रात शराबियों और असामाजिक तत्वों की भीड़ लगी रहती है। खुले में ग्रुप बनाकर लोग शराब पीते हैं। ठेके के बाहर शराब पीकर लोग खुलेआम महिलाओं से छींटाकशी, गाली-गलौज, झगड़े और उत्पात मचाते हैं, जिससे आम जनता विशेष रूप से महिलाएँ व छात्राएँ भय और असुरक्षा में जीने को मजबूर हैं।
स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि हाल ही में आगरा के थाना न्यू आगरा अंतर्गत नगला बूढ़ी में हाल ही में शराबी चालक की बेकाबू कार ने सात निर्दोष नागरिकों को कुचल दिया, जिससे पांच लोगों की मृत्यु हो गई। पूरा मामला संविधानिक और कानूनी दृष्टि से अत्यंत गंभीर है। इन ठेकों के संचालन से लोक शांति भंग, महिलाओं की सुरक्षा पर खतरा, और संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
पत्र में कानूनी एवं संवैधानिक दृष्टिकोण का भी हवाला दिया गया है और आबकारी विभाग के उन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके विरुद्ध विभागीय जांच एवं दंडात्मक कार्यवाही की मांग की गई है।
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