गृह विज्ञान संस्थान की छात्राओं को दी अग्निशमन उपायों की जानकारी, पूर्वाभ्यास करके भी दिखाया

आगरा, 11 मई। अग्नि सुरक्षा अभियान के तहत संजय प्लेस स्थित फायर स्टेशन के प्रभारी अग्निशमन अधिकारी सोमदत्त सोनकर ने विगत दिवस खंदारी परिसर स्थित डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के गृहविज्ञान संस्थान की छात्राओं को अग्निशमन उपायों की जानकारी दी।
संस्थान परिसर में स्थित गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं को इस मौके पर अग्निशमन का पूर्वाभ्यास भी करके दिखाया गया। एफएसओ सोमदत्त सोनकर ने मुख्य अतिथि के रूप में अग्निशमन के कारणों और उपायों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने घरों में प्रयुक्त होने वाले एलपीजी सिलेंडरन की ट्यूब हर चार छह माह पर चेक करते रहने का सुझाव दिया। सिलेंडर के आग पकड़ने पर बिना डरे उसका रेगुलेटर बंद करने की हिदायत दी।
उन्होंने कहा कि अधिकांश स्टिल्ट अपार्टमेंट में निजता या सुरक्षा के नाम पर आगे और पीछे दोनों जगह से खुले स्थान को बंद कर दिया जाता है, जिससे यह एक बाक्स में बदल जाता है और प्राकृतिक वेंटीलेशन लगभग पूरी तरह से समाप्त हो जाता है। अग्निकांड की स्थिति में तापमान और धुआं बढ़ता है, जिससे खतरनाक गैस कार्बन मोनोआक्साइड बनती है। इससे आक्सीजन का स्तर एकदम से कम हो जाता है। जिससे अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों गैस के चलते दम घुटने की आशंका बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि अपार्टमेंट में लगे एसी के आउटलेट बाहर की ओर होते हैं। एक साथ कई एसी चलने पर उनका तापमान बढ़ जाता है। प्राकृतिक वेंटीलेशन नहीं मिलने पर एसी फट जाते हैं। आग फैलती है तो लकड़ी, जिसमें पेट्रोलियम पदार्थों का उपयोग होता है, प्लास्टिक का इंटीरियर होने से आग तेजी से पकड़ती है। पूरे घर को अपनी चपेट में ले लेती है। इसके अलावा अधिकांश लोगों के घरों में मंदिर होता है, लोग उसमें नियमित दीपक जलाते हैं। उन्होंने कहा कि घर बंद करके जाने से पहले दीपक को वहां से हटा दें या बुझा दें। मंदिर के पास यदि पर्दा लगा है तो उसे हटा दें।
उन्होंने अग्निकांड से बचाव के लिए सुझाव देते हुए कहा कि इंटीरियर में आग पकड़ने वाली चीजों जैसे लकड़ी, प्लास्टिक वस्तुओं का प्रयोग कम से कम करें। इसकी जगह प्लास्टर आफ पेरिस (पीओपी) या कांच का प्रयोग कर सकते हैं। कार्बन मोनोआक्साइड गैस हवा से हल्की होने के कारण जमीन से लगभग डेढ़ फीट ऊपर होती है। अग्निकांड का स्थिति में जमीन सेफ जोन होती है। ऐसी स्थिति में फंसे व्यक्ति को जमीन पर लेट जाना चाहिए। जिससे उसकी दृश्यता बढ़ जाएगी। वह गैस ही चपेट में जल्दी नहीं आएगा, कोहनी के बल पर खिसककर बाहर की ओर निकलने का प्रयास करना चाहिए। जमीन पर लेटने से जीवन बचाने की संभावना बढ़ जाती है, गीला रूमाल या कपड़ा चेहरे पर लगाने से कार्बन मोनोआक्साइड का प्रभाव कम हो जाता है। पानी उपलब्ध है तो उसे खुद पर डाल लें, जिससे शरीर पर आग का ताप कुछ हद तक कम हो जाएगा। आग में फंसे व्यक्ति को बचने के लिए कुछ अतिरिक्त समय मिल जाएगा।
इससे पूर्व गृहविज्ञान संस्थान की निदेशिका डॉ अर्चना ने अग्निशमन अधिकारी सोमदत्त सोनकर का फूलों का बुके देकर स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिन्ह भी भेंट किया। इस दौरान संस्थान की शिक्षिकाएं भी मौजूद रहीं।
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