Inside story: चैंबर चुनाव परिणामों को लेकर हुई कोर कमेटी की बैठक में दिखे आक्रामक तेवर, एक पूर्व अध्यक्ष ने दिखाया आईना, शनिवार को फिर हो सकती है बैठक
आगरा, 19 मार्च। नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स यूपी के वार्षिक चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद उपजा विवाद अभी ठंडा नहीं पड़ा है। मतगणना के दौरान सवाल उठाए जाने पर शुरुआत में चुप्पी साधे कुछ पूर्व अध्यक्ष अब आक्रामक हो उठे हैं। उनके आक्रामक तेवरों को देख दूसरा पक्ष भी गरम हो उठा है।
गांधीनगर के निकट बाईपास सर्विस रोड पर स्थित एक रेस्तरां में बुधवार की रात्रि कोर कमेटी की बैठक में दोनों पक्षों में जमकर बहस हुई। सूत्रों का दावा है कि इस बहस के दौरान अध्यक्ष पद के पराजित प्रत्याशी मनोज गुप्ता द्वारा भेजा गया खेद-पत्र भी सामने रखा गया। तय किया गया कि शनिवार को कोर कमेटी की बैठक पुनः बुलाकर मनोज गुप्ता को बुलाया जाएगा और उनका पक्ष सुना जाएगा।
सूत्रों का दावा है कि योजना यह भी है कि मनोज गुप्ता से पूरी कमेटी के सामने माफी मंगवाई जाए और माफीनामा लिखवाकर मीडिया में जारी किया जाए।
हालांकि इसे लेकर मतभिन्नता भी है। निजी व्यस्तता के कारण बैठक में अनुपस्थित रहे एक पूर्व अध्यक्ष ने इस योजना का विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यदि गम्भीर एक्शन लेना है तो पूरी मतदान प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जांच की जाए। मनोज गुप्ता द्वारा कही गई बातों को सुना जाए, साथ ही चुनाव प्रक्रिया में शामिल रहे एक-दो पूर्व अध्यक्षों की गतिविधियों की भी इस वीडियो रिकॉर्डिंग में जांच कर ली जाए। कौन क्या कर रहा था, सामने आ जाएगा।
बैठक के बाद एक अन्य पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि यदि मनोज गुप्ता ने खेद व्यक्त करते हुए कोई पत्र भेज दिया था तो उसे बैठक की शुरुआत में ही सामने रख दिया जाना चाहिए था। ऐसा कर दिया जाता तो माहौल गर्म नहीं होता।
बैठक में पूर्व अध्यक्ष अतुल गुप्ता पर खुलकर मनोज गुप्ता का समर्थन करने के आरोप लगे। इस पर इस अतुल गुप्ता ने संविधान का हवाला देते हुए कह दिया कि इस पर रोक नहीं है। कोर कमेटी के चेयरमैन योगेन्द्र सिंघल ने भी स्वीकार किया कि किसी भी पूर्व अध्यक्ष के किसी प्रत्याशी के प्रचार पर रोक का नियम नहीं है। इसी बहस के दौरान एक-दो पूर्व अध्यक्षों ने पिछली बातों को न उठाने पर जोर दिया, हालांकि वह खुद चालीस साल पहले का एक मुद्दा उठा चुके थे, इस पर अतुल गुप्ता ने कह दिया कि जब वे चालीस साल पहले का मुद्दा उठा रहे हैं तो फिर 12-14 साल पहले का मुद्दा क्यों नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने साफ कहा कि अधिकांश पूर्व अध्यक्ष चुनाव प्रचार में परोक्ष रूप से सक्रिय थे। पिछले दिनों एक उद्यमी की वैवाहिक वर्षगांठ पर हुए समारोह में तो एक बुजुर्ग पूर्व अध्यक्ष ने उनके सामने ही एक प्रत्याशी के समर्थन की बात कही थी।
बैठक में फर्जी आईडी का मुद्दा भी उठा, आरोप लगाया गया कि करीब 85 आईडी ऐन मौके पर बनाई गईं। आरोप लगाने वाले पूर्व अध्यक्ष से इसके सबूत मांगे गए तो उन्होंने कह दिया कि वे सबूत देने को तैयार हैं, लेकिन यह भी तय कर लिया जाए कि सबूत सामने आने पर क्या कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मनोज गुप्ता चुनाव प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और पर्ची रजिस्टरों की गहन जांच की मांग कर चुके हैं, उस पर क्यों नहीं ध्यान दिया जा रहा है।
पूर्व अध्यक्षों की प्रतिष्ठा भी जुड़ गई थी चुनाव से
दरअसल चैंबर में अध्यक्ष पद का चुनाव इस बार प्रत्याशियों के साथ ही पूर्व अध्यक्षों के बीच प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया था। एक तरफ अतुल गुप्ता खुलकर मनोज गुप्ता का समर्थन कर रहे थे तो दूसरी ओर अधिकांश पूर्व अध्यक्ष मनोज बंसल के साथ दिखाई दे रहे थे। कुछ पूर्व अध्यक्ष अपना समर्थन खुलकर व्यक्त नहीं कर रहे थे। चुनाव को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए जातिवाद का भी सहारा लिया गया। एक पक्ष ने कहा कि शुरू में मनोज गुप्ता ने सामाजिक कार्ड खेला लेकिन बाद में उन्होंने ही इसे सिरे से इनकार कर दिया। लेकिन मनोज गुप्ता के समर्थकों का कहना है कि यह प्रतिद्वंद्वी द्वारा अपनाई गई कूटनीति थी। उनका कहना है कि जब कुल 1600 से अधिक मतदाताओं की सूची में केवल ढाई सौ से अधिक माथुर वैश्य मतदाता हैं तो ऐसे मनोज गुप्ता सामाजिक कार्ड खेलने की गलती क्यों करेंगे।
तो क्या मनोज गुप्ता को अगले वर्ष रोकने की कूटनीति है ये?
सूत्रों का दावा है कि पूर्व अध्यक्षों के ग्रुप ने अगले वर्ष के लिए अध्यक्ष पद पर अपना प्रत्याशी तय कर लिया है। पैनल भी लगभग तय है। दूसरी ओर इस बार चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद मनोज गुप्ता अगले वर्ष फिर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। इसलिए उनके विरोधियों की योजना है कि अभी से उन पर अंकुश कस लिया जाए। इसीलिए दबाव बनाया जा रहा है कि मनोज गुप्ता से सार्वजनिक माफी मंगवाई जाए और मीडिया में भी उसे प्रसारित किया जाए।
इसका विरोध कर रहे एक पूर्व अध्यक्ष का कहना है कि यदि ऐसा होता है तो फिर चैंबर या कोर कमेटी को यह भी तय कर लेना चाहिए कि भविष्य में सभी एक्शन मीडिया में जारी किए जाएं।
रात करीब पौने दस बजे तक चली बैठक में कोर कमेटी के चेयरमैन ने चुनाव सुधार के कुछ बिंदुओं को रखने का भी प्रयास किया, लेकिन बदले माहौल के कारण विलम्ब बताते हुए उन्हें अगली बैठक में रखने को कह दिया गया।
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