डीसीपी का नाम लेकर दरोगा ने पूर्व सैनिक से मांगी बीस लाख की रिश्वत, निलंबित

आगरा, 18 मार्च। कारगिल युद्ध लड़ चुके एक पूर्व सैनिक ने इरादत नगर थाने के एसआई मानवेंद्र गंगवार पर 20 लाख रुपये रिश्वत मांगने का गम्भीर आरोप लगाया है। आरोप है कि जमीन कब्जे के एक मुकदमे में चार लोगों के नाम हटाने के एवज में प्रति व्यक्ति 5 लाख रुपये की मांग की गई।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व सैनिक ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत के साथ बातचीत का वीडियो भी सौंपा। वीडियो में एसआई कथित तौर पर न सिर्फ रिश्वत की रकम तय करता सुनाई दे रहा है, बल्कि डीसीपी का नाम लेकर पैसे की मांग करता भी नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और एसआई मानवेंद्र गंगवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
शिकायत के साथ सौंपे गए वीडियो में एसआई कथित रूप से कहता सुनाई दे रहा है कि “सभी लोगों के नाम निकलवाने हैं तो पांच लाख रुपये प्रति व्यक्ति देने होंगे। डीसीपी साहब को बस रुपये चाहिए।” इतना ही नहीं, वीडियो में वह यह भी कहता है कि “मुझे 60 हजार रुपये में चौकी इंचार्ज बनाया जा रहा था, लेकिन मेरी दो महीने बाद शादी है। चौकी इंचार्ज तो मैं जब चाहूंगा तब बन जाऊंगा।”
इस कथित बातचीत ने पूरे मामले को और ज्यादा गंभीर बना दिया है, क्योंकि इसमें न केवल रिश्वत मांगने का आरोप है, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर दबाव बनाने की बात भी सामने आई है।
शिकायतकर्ता नागेंद्र कुमार, जो कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक बताए जा रहे हैं, ने पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि विवेचक लगातार उन्हें पैसे देने के लिए दबाव बना रहा था। नागेंद्र कुमार का कहना है कि एसआई ने उन्हें कई बार बुलाया, फोन पर बात की और जल्द से जल्द पैसों का इंतजाम करने को कहा। आरोप है कि यदि रुपये नहीं दिए गए तो मुकदमे में नाम बनाए रखते हुए एफआर लगाने और जेल भेजने की धमकी दी जा रही थी।
खबरों के मुताबिक, इरादत नगर थाने में वर्ष 2025 में जयप्रकाश शर्मा, गजेंद्र पाल, वातेंद्र, नगेंद्र और सत्यवीर के खिलाफ जमीन कब्जे का मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले की विवेचना एसआई मानवेंद्र गंगवार कर रहे थे। शिकायत के अनुसार, विवेचना के दौरान ही एसआई ने कथित रूप से केस से नाम हटाने के लिए रिश्वत की डिमांड शुरू कर दी। आरोप है कि चार लोगों के नाम हटाने के लिए कुल 20 लाख रुपये मांगे गए।
पूर्व सैनिक नागेंद्र कुमार ने अपनी शिकायत में कहा है कि रिटायरमेंट के बाद उन्होंने साल 2021 में रोहता निवासी जयप्रकाश से जमीन का बैनामा कराया था। इसके बाद दाखिल-खारिज भी हो गई और वह जमीन पर विधिवत काबिज भी हैं। लेकिन उनका आरोप है कि करीब पांच साल बाद अचानक उनके समेत चार अन्य लोगों के खिलाफ फर्जी तरीके से जमीन कब्जे का मुकदमा दर्ज करा दिया गया। नगेंद्र कुमार का कहना है कि यह मुकदमा पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण है और उन्हें अनावश्यक रूप से फंसाया जा रहा है।
कहा जा रहा है कि मामले में नगेंद्र, वातेंद्र और सत्यवीर ने हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर भी प्राप्त कर लिया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने विवेचक को अपनी ओर से सभी जरूरी साक्ष्य और दस्तावेज भी उपलब्ध करा दिए थे। इसके बावजूद आरोप है कि विवेचक नाम हटाने के लिए प्रति व्यक्ति पांच लाख रुपये की मांग करता रहा। शिकायत में कहा गया है कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी दी जा रही थी।
डीसीपी अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि एसआई के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। पूरे मामले की जांच एसीपी शमशाबाद को सौंपी गई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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