तीनों प्रमुख पदों के पर्चे वैध, लेकिन कार्यकारिणी के छह नामांकन अवैध, तीन सदस्यों का निर्विरोध चुना जाना तय || वार्ष्णेय ने उठाए चुनाव समिति पर सवाल, मनीष बोले- संविधान के अनुरूप ही होंगे चुनाव || कहीं फिर जातिवादी राजनीति में न फंस जाए चुनाव

आगरा, 01 मार्च। नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स यूपी आगरा के वार्षिक चुनावों के लिए शनिवार को नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद रविवार को चुनाव समिति ने इन नामांकन पत्रों की जांच की।
चुनाव समिति के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि अध्यक्ष पद पर प्राप्त दो नामांकन पत्र क्रमशः मनोज बंसल, मनोज कुमार गुप्ता, उपाध्यक्ष पद पर प्राप्त तीन नामांकन पत्र अम्बा प्रसाद गर्ग, नीतेश अग्रवाल, गिरीश चंद गोयल, कोषाध्यक्ष पद पर प्राप्त तीन सतीश अग्रवाल, नीरज अग्रवाल, विनय मित्तल के नामांकन वैध पाये गये। कार्यकारिणी के 14 समूहों में 57 नामांकन पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 6 नामांकन पत्र (समूह संख्या 4 में 1, समूह 6 में 3 एवं समूह संख्या 10 में 1 व समूह संख्या 14 में 1) अपूर्ण पाये जाने के कारण चुनाव समिति द्वारा निरस्त किये गये। शेष 51 नामांकन पत्र वैध पाये गये। समूह संख्या 5 में दो कार्यकारिणी पद के लिये 2 व समूह संख्या 7 में एक कार्यकारिणी पद के लिये 1 ही नामांकन प्राप्त हुए। ऐसे में इनका निर्विरोध चुना जाना तय हो गया है। औपचारिक घोषणा चुनाव परिणामों के समय होगी।
नामांकन वापसी की तिथि नौ मार्च को सायं पांच बजे तक है तथा वार्षिक चुनाव 14 मार्च को वाटर वर्क्स स्थित अग्रवन में प्रातः 10.30 बजे से 3 बजे तक होंगे। नामांकन पत्रों की जांच करने वालों में समिति के सह अध्यक्ष श्रीकिशन गोयल, सदस्य राजकुमार अग्रवाल, सीताराम अग्रवाल, अनिल वर्मा, महेन्द्र कुमार सिंघल, अध्यक्ष संजय गोयल शामिल थे।
वार्ष्णेय ने उठाए चुनाव समिति पर सवाल, मनीष बोले- संविधान के अनुरूप ही होंगे चुनाव
उधर प्रत्याशियों के राजनीतिक दल से जुड़ाव का मुद्दा अभी ठंडा नहीं पड़ा है। इस बारे में चैंबर के पूर्व अध्यक्ष और संविधान संशोधन समिति के सह अध्यक्ष रहे प्रदीप कुमार वार्ष्णेय ने चुनाव समिति पर सवाल उठाए। उन्होंने संविधान में उल्लेख न होने पर भी चुनाव समिति द्वारा प्रत्याशियों से स्व-घोषणापत्र लिए जाने पर आपत्ति की। वार्ष्णेय ने कहा कि जब संविधान संशोधन का पालन ही नहीं किया जाना है तो संविधान बनाने या संशोधन करने का क्या लाभ है। उन्होंने कहा कि शपथपत्र अधिकतर असत्य होते हैं, ऐसे में स्व-घोषणा पत्र के सत्य या असत्य होने की अपेक्षा कैसे कर सकते हैं? चुनाव समिति का यह कर्तव्य है कि वह पूरी सावधानी से कार्य करे और संविधान के अनुसार नामांकन पत्र की जाँच करे। 
इस बारे में चुनाव समिति के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने कहा कि स्व-घोषणापत्र अतिरिक्त ऐहतियात के रूप में लिए गए हैं। इसके बाद भी यदि किसी प्रत्याशी का राजनीतिक दल या अन्य संगठनों से जुड़ाव पाया गया तो उसके खिलाफ संविधान के अनुरूप ही कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि अध्यक्ष पद के प्रत्याशी का अन्य किसी भी राजनीतिक, गैरराजनीतिक या व्यापारिक संस्थाओं में पदाधिकारी होना अमान्य है। इसी प्रकार उपाध्यक्ष या कोषाध्यक्ष पद के प्रत्याशियों का किसी राजनीतिक दल में पद पर होना अमान्य है।
दो पैनलों में बंटे प्रत्याशी
चैंबर चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष तीनों प्रमुख पदों पर प्रत्याशी दो पैनलों में बंटे दिख रहे हैं। शहर के कार्यक्रमों में अपने-अपने पैनल के साथ ही उपस्थिति दिख रही है। इसके अलावा व्यक्तिगत तौर पर भी मतदाताओं से संपर्क साधा जा रहा है। सर्वाधिक रोमांचक संघर्ष अध्यक्ष पद को लेकर नजर आ रहा है। इस पद पर दो प्रत्याशी मैदान में हैं और दोनों ही प्रत्याशियों द्वारा दावे-प्रति दावे किए जा रहे हैं। 
अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों ने एक कदम आगे बढ़कर शहर के प्रतिष्ठित बुजुर्गों का सहारा लेना भी शुरू कर दिया है। इन बुजुर्गों से अनुरोध कराकर मतदाताओं को अपने पाले में खींचने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कहीं फिर जातिवादी राजनीति में न फंस जाए चुनाव 
इस बीच कुछ वरिष्ठ सदस्य चिंता में है कि चैंबर चुनाव कहीं फिर जातिवादी राजनीति में न फंस जाए। कुछ वर्ष पहले तक चैंबर में पंजाबी बनाम अग्रवाल की राजनीति को हवा दी गई थी। लेकिन पिछले कुछेक वर्षों में इसे दूर कर लिया गया। इस बार कुछ लोगों द्वारा माथुर वैश्य बनाम अग्रवाल की राजनीति को हवा देने के प्रयास हो रहे हैं। बुजुर्ग सदस्य इस प्रकार की राजनीति को चैंबर हित में नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि उद्योग और व्यापार हित में सभी जातियों का साथ रहना आवश्यक है।
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