अटल गीत गंगा ये बहती रहेगी.....

आगरा, 17 अगस्त। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर रविवार को "अटल गीत गंगा परिवार" द्वारा साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ निर्मला दीक्षित ने बताया कि अटलजी ने मुझे सिखाया कि सदैव न्याय और सत्य के पथ पर चलना भले कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं। विशिष्ट अतिथि केंद्रीय हिंदी संस्थान से प्रोफेसर उमापति दीक्षित ने कहा कि यथानाम तथा गुण की भाँति वे अपने निर्णय सदैव विचारकर लेते थे पर जो एकबार निर्णय कर लिया फिर उस पर अटल रहते थे। डॉ शुभदा पांडे ने कहा कि वे ऐसे अजात शत्रु थे, जिनका विपक्ष भी सम्मान करता था।
आचार्य उमाशंकर पाराशर ने अटलजी से जुड़े संस्मरण और गीत प्रस्तुत किया। प्रभुदत्त उपाध्याय ने कई प्रसंग साझा किए। कवि राकेश निर्मल ने ग़ज़ल के माध्यम से महापुरुषों के अनुकरणीय व्यक्तित्व को वर्णित किया। अरुणेंद्र तिवारी और प्रभात दीक्षित ने भी प्रसंग सुनाए। कवयित्री डॉ रुचि चतुर्वेदी की पंक्तियाँ 
अटल देह तजकर कहाँ चल दिए,
अटल  गीत  गंगा ये बहती  रहेगी।
सुनकर सभी की आँखें नम हो गईं। संस्थापक अध्यक्ष डीजीसी राजस्व अशोक चौबे ने अटल गीत गंगा की स्थापना से जुड़े प्रसंग और अपने शब्द सुमन एक रचना के माध्यम से व्यक्त किए....
ऐसे जनप्रिय नेता तो सदियों में आते हैं।
कविवर अटल बिहारी की हम गाथा गाते हैं।
कार्यक्रम का संचालन कवि पदम् गौतम ने किया।
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