डीएसएस प्रकरण में रेलवे जांच समिति बोली- सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो पूरा सच नहीं
आगरा, 16 जुलाई। आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर विगत 12 जुलाई को आरपीएफ जवानों द्वारा डिप्टी स्टेशन सुप्रिटेंडेंट (डीएसएस) के साथ मारपीट प्रकरण में जीआरपी ने तीन ऑटो रिक्शा चालकों कर जेल भेजा है। दूसरी ओर पूरे मामले की जांच कर रहे रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है, वह पूरा सच नहीं है।
डिप्टी एसएस नरेंद्र चाहर ने चार आरपीएफ जवानों सहित कई ऑटो चालकों पर अभद्रता, मारपीट और सरकारी कार्य में बाधा डालने के गंभीर आरोप लगाए थे।
जीआरपी ने घटना की सीसीटीवी फुटेज के आधार पर तीन लोगों को चिन्हित कर लिया था। पुलिस उनकी तलाश कर रही थी। बुधवार दोपहर तीनों ऑटो चालकों को स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए तीनों आरोपियों योगेश, मनीष और एबरार पर स्टेशन मास्टर से अभद्रता और सरकारी कार्य में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया।
इस पूरे मामले में अरोपी दो एएसआई और दो कांस्टेबल निलंबित किए जा चुके हैं। प्रकरण में जांच समिति 20 वीडियो, 140 सीसीटीवी फुटेज और सभी पक्षों के बयानों की जांच कर रही है। एक-एक वीडियो को मिनट टू मिनट देखा जा रहा है। जांच समिति ने लोगों से अपील की कि वीडियो के कुछ हिस्से देखकर इमोशनल न हों। किसी भी बात को छुपाया नहीं जाएगा। ट्रेन रोकने के लिए भड़काऊ बयान देने वाले कुछ लोगों को भी चिन्हित कर लिया गया है।
इस मामले में आरपीएफ कमांडेंट राजमोहन पिचाई ने बुधवार को मीडिया के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी कर्मचारी के साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार उचित नहीं है। ऐसे हालात क्यों बने, इसकी निष्पक्ष जांच के लिए जांच समिति गठित की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि हीराकुंड एक्सप्रेस को रुकवाने में किस-किस कर्मचारी की क्या भूमिका रही, यह भी जांच का विषय है। लोको पायलट, रेलवे गार्ड और डिप्टी एसएस के बीच वाॅकी-टाॅकी पर क्या बात हुई, इस वार्तालाप को भी डिजिटल साक्ष्य के रूप में जांच में संकलित किया जाएगा। साथ ही घटना वाले दिन प्लेटफॅार्म के सीसीटीवी कैमरों के फोटो और वीडियो भी जांच में शामिल किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन में कुछ बाहरी व आसामाजिक लोगों की एंट्री हो गई है, जिससे पूरे प्रदर्शन को गलत दिशा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। रेल रोकने और चक्का जाम करने जैसी गतिविधियों के इनपुट भी आरपीएफ को मिले हैं। ऐसे लोगों पर आरपीएफ नजर बनाए हुए है और किसी भी कीमत पर ट्रेनों का चक्का जाम नही होने दिया जाएगा।
डीएसएस की पत्नी ने आरोपी आरपीएफ कर्मियों द्वारा माफी मांगने की शर्त भी रखी थी। मांग पूरी न होने और आरोपियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई न होने के चलते मंगलवार को डीएसएस की बहन नीतू और पत्नी हरेंद्री चाहर पटरी पर लेट गईं थीं। साथी कर्मचारी के साथ गलत व्यवहार होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर रेलवे यूनियनों ने भी मोर्चा खोल दिया। घटना पर ऑल इंडिया रेलवे स्टेशन मास्टर एसोसिएशन का आंदोलन लगातार जारी है। रेलवे यूनियनों ने कार्रवाई में देरी होने की दशा में चक्का जाम, रेलवे ट्रैक उखाड़ने की चेतावनी दी है, जिसे लेकर रेलवे के उच्चाधिकारियों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं।
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