वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस ने घायल लकड़बग्घे की जान बचाई
आगरा, 12 दिसम्बर। जिले की फतेहाबाद तहसील के बिलपुरा गांव से हाल ही में एक मादा लकड़बग्घे को बचाया गया। स्थानीय किसानों ने उसे अपने खेतों में असहाय और घायल अवस्था में देखा और अधिकारियों को सूचित किया। उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए घायल जानवर को सुरक्षित बचाया और चिकित्सा उपचार के लिए पहुंचाया।
लकड़बग्घा गंभीर रूप से निर्जलित था एवं उसके सिर और चेहरे पर गंभीर चोटों के साथ ही सूजन भी थी जिससे उसकी दृष्टि बाधित हो रही थी और उसका निचला जबड़ा घायल था, जिसकी बाद में एक्स-रे जांच में जबड़े में फ्रैक्चर का पता चला। घायल लकड़बग्घे का वर्तमान में वाइल्डलाइफ एसओएस के भालू संरक्षण केंद्र में गहन चिकित्सा उपचार चल रहा है।
इंडियन स्ट्राइप हाइना (लकड़बग्घा) वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित है और भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाने वाली लकड़बग्घे की एकमात्र प्रजाति है। आई.यू.सी.एन की रेड लिस्ट में इसे 'नियर थ्रैटंड’ (संकट के निकट) श्रेणी में रखा गया है और इसकी वैश्विक आबादी 10,000 से कम होने का अनुमान है।
डीएफओ, राजेश कुमार ने कहा, “ग्रामीणों की त्वरित प्रतिक्रिया और वन विभाग तथा वाइल्डलाइफ एसओएस के समन्वित प्रयासों ने इस लकड़बग्घे को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि घायल वन्यजीवों को समय पर सहायता और सर्वोत्तम संभव देखभाल मिले।”
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, “यह बचाव अभियान वन्यजीवों की सुरक्षा में सामुदायिक जागरूकता के महत्व को उजागर करता है। इस तरह की चोटें अक्सर मानव-वन्यजीव संघर्ष का परिणाम होती हैं, और समय पर हस्तक्षेप किसी जानवर के जीवित रहने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।”
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