सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्यों के दिए सड़क सुरक्षा संबंधी निर्देश- सार्वजनिक वाहनों में ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन की स्थापना सुनिश्चित करें, स्पीड लिमिटिंग डिवाइस अनिवार्य बनाएं, तीन माह में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड का गठन करें

आगरा 13 मई। अधिवक्ता एवं याचिकाकर्ता के.सी. जैन के मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला एवं न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने केंद्र और राज्य सरकारों को सड़क सुरक्षा संबंधी कई निर्देश जारी किए हैं।
इन निर्देशों में कहा गया कि सभी राज्य सरकारें/केंद्र शासित प्रदेश नए और पुराने दोनों प्रकार के सार्वजनिक सेवा वाहनों में समयबद्ध एवं सत्यापनीय तरीके से ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन की स्थापना सुनिश्चित करें। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 56 के अंतर्गत फिटनेस प्रमाण पत्र तथा धारा 66 के अंतर्गत परमिट तभी जारी किया जाए जब VAHAN पोर्टल पर ट्रैकिंग डिवाइस की स्थापना और कार्यशीलता का सत्यापन हो चुका हो।
केंद्र सरकार सभी वाहन निर्माताओं को निर्माण/वितरण के समय ही स्पीड लिमिटिंग डिवाइस लगाने के अनिवार्य एवं बाध्यकारी निर्देश दे तथा पर्याप्त दंड के प्रावधान सहित अनुपालन सुनिश्चित करे। सभी राज्य सरकारें/केंद्र शासित प्रदेश VAHAN/परिवहन पोर्टल के सत्यापित आंकड़ों सहित एक ताजा व्यापक शपथपत्र दाखिल करें जिसमें कुल परिवहन वाहन, स्पीड लिमिटिंग डिवाइस युक्त वाहनों की संख्या और अनुपालन प्रतिशत की जानकारी दी जाए। नियम 118 का उल्लंघन करने वाले वाहनों को धारा 56 के अंतर्गत फिटनेस प्रमाण पत्र देने से इनकार किया जाए।
न्यायालय ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 215B के अंतर्गत राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के गठन के लिए केंद्र सरकार को अंतिम अवसर के रूप में केवल तीन महीने का समय दिया है। अगली सुनवाई तीन सितंबर को निर्धारित की गई है।
न्यायालय ने कहा कि अधिकांश वाहन चालक अशिक्षित हैं और उन्हें लेन अनुशासन के महत्व की जानकारी ही नहीं है। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में लेन पालन की न कोई परीक्षा है, न कोई प्रशिक्षण और न ही कोई जागरूकता। जो नियम जानता ही नहीं, वह पालन कैसे करेगा? न्यायालय ने दो महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए— पहला, चालकों में लेन अनुशासन के प्रति जागरूकता कैसे बढ़ाई जाए? और दूसरा, इस नियम का प्रवर्तन व्यावहारिक धरातल पर कैसे सुनिश्चित किया जाए?
अधिवक्ता के.सी. जैन ने न्यायालय के समक्ष कहा कि लेन उल्लंघन को भी इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के दायरे में स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि अब केवल साधारण कैमरे पर्याप्त नहीं हैं। सड़कों पर लगे कैमरों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) से सुसज्जित किया जाए ताकि वे स्वतः बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के लेन उल्लंघन को पहचान सकें, वाहन का नंबर दर्ज कर सकें और तत्काल चालान जारी कर सकें। 
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